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क्या टेक फ़ंड में निवेश का ये अच्छा समय है?

भारत के IT सेक्टर के लिए पिछले कुछ महीने अच्छे नहीं गुज़रे, इस समय आपको इस सेक्टर में निवेश करना कैसा रहेगा

क्या टेक फ़ंड में निवेश का ये अच्छा समय है?

Tech Funds: भारत के टेक स्टॉक (tech stocks) में निवेश करने वाले म्यूचुअल फ़ंड्स (mutual funds) के लिए, बीते 12 महीने निराश करने वाले रहे. इसके लिए पूरे टेक सेक्टर को ज़िम्मेदार ठहराया गया, जो इस दौरान क़रीब एक चौथाई (23.04 फ़ीसदी) टूटा.

वहीं, TCS (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़), इंफोसिस, विप्रो सहित ज़्यादातर दिग्गज कंपनियों को झटका लगा है.

ब्याज दरों में बढ़ोतरी, जिओपॉलिटिकल टेंशन, ज़्यादा वैलुएशन ऐसी कुछ वजह हैं, जिनके चलते टेक्नोलॉजी सेक्टर कमज़ोर बना हुआ है. स्वाभाविक रूप से, म्यूचुअल फ़ंड्स के लिए बीता एक साल ख़ासा भयावह रहा, जिसे भूलना आसान नहीं. टेक्नोलॉजी स्टॉक में निवेश करने वाले फ़ंड को टेक फ़ंड कहा जाता है.

हालांकि, टेक्नोलॉजी सेक्टर की ये बदक़िस्मती किसी फ़ंड हाउस के लिए मौक़े जैसी है.

टेक स्टॉक्स की पिटाई से इनमें निवेश करने वाले तमाम फ़ंड हाउस को सस्ती क़ीमत पर मज़बूत फ़ंडामेंटल वाली और कैश-रिच IT कंपनियों में निवेश का मौक़ा मिला है.

लेकिन क्या कम क़ीमत देखते हुए एक इन्वेस्टर के तौर पर आपको इस समय टेक फ़ंड्स में निवेश करना चाहिए?

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टेक सेक्टर की दिशा क्या है?
फ़िलहाल, किसी को इसकी जानकारी नहीं है. भले ही ये वक़्त, निवेश के लिहाज़ से लुभावना नज़र आता है, लेकिन इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि भारत के टेक्नोलॉजी स्टॉक्स का नियर-टर्म आउटलुक ख़ास अच्छा नहीं दिखता.

ऐसी भी आशंकाएं हैं कि इन स्टॉक्स में आगे और गिरावट देखने को मिल सकती है. जानिए क्यों:

  • अमेरिका में आर्थिक मंदी की आशंकाएं गहराना: बैंक तबाह हो गए, कंज्यूमर्स कम ख़र्च कर रहे हैं और फ़ैक्टरी आउटपुट सुस्त है, जो इस बात का प्रमाण है कि इकोनॉमी ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद के असर से जूझ रही है. इससे भी ज़्यादा नेगेटिव बात है कि अप्रैल में जारी Federal मीटिंग के मुताबिक़, उनके स्टाफ़ इकोनॉमिस्ट ने निजी तौर पर इस साल के आखिर में “एक हल्की मंदी" का अंदेशा ज़ाहिर किया है.

भारत के IT सेक्टर के लिए कोई भी मंदी बुरी ख़बर है, क्योंकि वो काफ़ी हद तक, पश्चिम की कंपनियों को टेक सर्विस और सपोर्ट उपलब्ध कराने पर निर्भर हैं.

  • AI के आने से उथल-पुथलः ChatGPT जैसे जेनरेटिव AI मॉडल, भारतीय IT कंपनियों के लिए बुरी ख़बर हो सकते हैं. जेपी मॉर्गन (JP Morgan) ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था, “चैट-जीपीटी से परम्परागत रूप से चली आ रही सेवाओं पर ख़ासा असर होगा.” टेक्नोलॉजी सेक्टर में इस तरह से तेज़ी से होने वाले बदलावों के चलते लंबे समय में IT कंपनियों के लिए अतिरिक्त अनिश्चितता पैदा होगी.
  • वैलुएशन अभी भी ज़्यादाः पिछले कुछ महीनों के दौरान भारी गिरावट के बावजूद, IT स्टॉक्स की वैलुएशन ज़्यादा बना हुआ है. नाम नहीं ज़ाहिर करने की शर्त पर एक फ़ंड मैनेजर ने सहमति जताते हुए कहा, “कोविड से पहले के दौर की तुलना में वैलुएशन अभी भी ज़्यादा बनी हुई है.”

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आप क्या करें
ज़्यादा समझदारी भरी रणनीति अपनाएं और ऐसे डाइवर्सिफ़ाइड फ़ंड्स के बारे में सोचें जो ज़्यादा संतुलन वाली रणनीति अपनाते हैं.

टेक फ़ंड्स, जैसे थिमैटिक/ सेक्टोरल फ़ंड ज़्यादा उतार-चढ़ाव वाले हो सकते हैं. नीचे दिए गए ग्राफ़ से भी ये बात स्पष्ट होती है. ये फ़ंड खास सेक्टरों में निवेश पर ज़ोर देते हैं, इसलिए किसी ख़ास सेक्टर के कमज़ोर होने पर होने पर इनका प्रदर्शन संदिग्ध हो जाता है.

वहीं, डाइवर्सिफ़ाइड इक्विटी फ़ंड्स (Diversified equity funds) हर साइज़ और सेक्टर की कंपनियों में निवेश करते हैं. इससे किसी ख़ास सेक्टर में कमज़ोर प्रदर्शन का असर कम होता है. इन फ़ंड्स में निवेश से, इन्वेस्टर दूसरे सेक्टरों में संभावित मज़बूती का फ़ायदा उठा सकते हैं. इससे कुछ सेक्टरों में हुए नुक़सान की भरपाई हो सकती है.

दिलचस्प बात ये है कि कई फ़्लेक्सी-कैप और लार्ज-कैप फ़ंड (जो डाइवर्सिफ़ाइड इक्विटी फ़ंड्स हैं) अपने पोर्टफ़ोलियो का 9-10 फ़ीसदी IT स्टॉक्स को ऐलोकेट करते हैं.

कुल मिलाकर, टेक फ़ंड्स के लिए IT स्टॉक्स में निवेश का अवसर भले ही नजर आ रहा है, लेकिन IT सेक्टर के लिए नियर-टर्म आउटलुक अनिश्चित बना हुआ है. इन चुनौतियों से निपटने के लिए निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और इसके बजाय एक अच्छी तरह से डाइवर्सिफ़ाइड इक्विटी फ़ंड में निवेश करने पर विचार करना चाहिए.

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