Published on: 18th Mar 2025
डैनियल काह्नमैन एक नोबेल पुरस्कार विजेता मनोवैज्ञानिक थे जिन्होंने फ़ैसले लेने की प्रक्रिया को समझने में क्रांतिकारी योगदान दिया.
2024 में, 90 साल की उम्र में, उन्होंने अपनी बिगड़ती सेहत को देखते हुए आत्महत्या में मदद लेने का निर्णय लिया – यह पूरी तरह सोच-समझ कर लिया गया फ़ैसला था.
उन्होंने दिखाया कि इंसान के फ़ैसले भावनाओं और झुंड मानसिकता से प्रभावित होते हैं, जिससे निवेशक अक्सर ग़लत निर्णय लेते हैं.
बाज़ार में उतार-चढ़ाव डर, लालच और अति-आत्मविश्वास की वजह से होता है. निवेशकों को इस मानसिकता से बचना चाहिए.
उन्होंने कहा कि निवेशकों को अपनी जोखिम लेने की क्षमता को ईमानदारी से समझना चाहिए और पूर्वाग्रहों को पहचानना चाहिए.
अच्छे फ़ैसले हमेशा अच्छे नतीजे नहीं देते. काह्नमैन के मुताबिक़, प्रक्रिया पर ध्यान देना ज़्यादा ज़रूरी है.
निवेशकों को नियम और रणनीतियां बनानी चाहिए, ताकि वे भावनाओं के बहाव में आकर ग़लत निर्णय न लें.
काह्नमैन के अनुसार, शानदार मुनाफ़े के बजाय, नुक़सान से बचना निवेश की सबसे बड़ी रणनीति होनी चाहिए.
उनका आख़िरी फ़ैसला दिखाता है कि उनके सिद्धांत केवल रिसर्च नहीं थे, बल्कि जीवन के हर निर्णय पर लागू होते हैं.
भावनाओं से प्रभावित हुए बिना, तर्कसंगत और स्पष्ट रूप से निर्णय लेना ही काह्नमैन की सबसे बड़ी सीख है.