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इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफ़ैक्चरिंग सर्विस इंडस्ट्री को समझने के लिए पढ़ें

भारत की तेज़ी से बढ़ती इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफ़ैक्चरिंग सर्विस (EMS) इंडस्ट्री की ग्रोथ, ऑपरेशन और निवेश क्षमता को जानें

इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफ़ैक्चरिंग सर्विस इंडस्ट्री को समझने के लिए पढ़ें

टेक्नोलॉजी की तेज़ी से बढ़ती दुनिया में, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफ़ैक्चरिंग सर्विस (EMS) इंडस्ट्री, वैश्विक बाज़ार में एक डायनामिक सेक्टर के तौर पर खड़ी है, इस इंडस्ट्री की कई कंपनियां न सिर्फ़ हाल ही में लिस्टिड हुई हैं, बल्कि उन्होंने अच्छा प्रदर्शन भी किया है. ज़ाहिर है, ये इंडस्ट्री अपनी ग्रोथ की क्षमता की वजह से सुर्ख़ियों में बनी हुई है.

फ्रॉस्ट एंड सुलिवन (Frost & Sullivan) के मुताबिक़, भारतीय EMS इंडस्ट्री वित्त-वर्ष 26 तक 34 फ़ीसदी की वार्षिक दर से बढ़ने की उम्मीद है, जो ₹4.5 लाख करोड़ के क़ीमत तक पहुंच जाएगा. इस बढ़ेतरी का क्रेडिट, मौजूदा 'चाइना प्लस वन' ट्रेंड को दिया जाता है, जहां कंपनियां (ज़्यादातर विकसित देशों में) अपनी सप्लाई चेन में डाइवर्सिटी या विविधता लाने और सिर्फ़ चीन पर अपनी निर्भरता से दूर जाने की कोशिश कर रही हैं.

इस ग्रोथ को और बढ़ावा देने के लिए, भारत सरकार ने PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) स्कीम शुरू की है, जो निवेश को लुभाने के साथ-साथ मैन्युफ़ैक्चरों को प्रोत्साहन भी देगी.

इसलिए, हमने गहराई में जाकर ये देखने का फ़ैसला किया कि इस इंडस्ट्री में कंपनियां कैसे काम करती हैं और ऐसी कंपनियों का विश्लेषण करते वक़्त किन बातों को देखना चाहिए.

EMS को समझना: ऑपरेशन और कैटेगरी
इस इंडस्ट्री में कंपनियां वैश्विक कस्टमर ब्रांडों के लिए कॉन्ट्रेक्ट मैन्युफैक्चरर के तौर पर काम करती हैं. शुरू में, इन कंपनियों ने सिर्फ़ मैन्युफ़ैक्चरिंग और असेंबलिंग प्रोडक्ट्स जैसे सेक्टरों पर ही फ़ोकस किया. हालांकि, पिछले कुछ साल में, उन्होंने प्रोडक्ट की डिज़ाइनिंग में काम को फैलाया. इन कंपनियों के संचालन को चार बड़ी कैटेगरी में बांटा जा सकता है:

  • ओरिजनल डिज़ाइन मैन्युफ़ैक्चरिंग : कंपनियां (original design manufacturers या ODM), ओरिजनल इक्वुपमेंट मैुन्युफ़क्चरर (OEM) द्वारा दिये गए ख़ास विवरण के मुताबिक़ प्रोडक्ट की मैन्युफ़ैक्चरिंग करती हैं.
  • इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफ़ैक्चरिंग सर्विस : ये भारत में सबसे लोकप्रिय मॉडल है, जहां कंपनियां कस्टमरों की ख़ासयितों के आधार पर प्रोडक्ट बनाती हैं.
  • जॉब वर्क : कंपनियां सिर्फ़ प्रोडक्ट को असेंबल करने के लिए ज़िम्मेदार हैं. बहुत छोटी आकार की कंपनियां इस मॉडल का फ़ॉलो करती हैं.
  • आफ़्टर सेल्स सर्विस : कंपनियां बाज़ार में अपने कस्टमर के ब्रांड की पहचान (brand identity) बनाए रखने के लिए ज़िम्मेदार हैं.

भारत में, इस इंडस्ट्री में कंपनियों द्वारा दी जाने वाली खास सर्विस में प्रिंटिड सर्किट बोर्ड (PCB) असेंबली, इलेक्ट्रॉनिक्स के बॉक्स बिल्ड (अंतिम उत्पाद का निर्माण, जिसमें OEM का लोगो (logo) जोड़ना और बिक्री के लिए गोदाम में भेजना शामिल है) और कस्टमर का कॉन्ट्रेक्ट मैन्युफ़ैक्चरिंग शामिल है.

आइए इस इंडस्ट्री की कंपनियों की कुछ आम विशेषताओं पर एक नज़र डालें.

EMS कंपनियों के कुछ फ़ीचर

कस्टमर रिलेशनशिप और रिवेन्यू कॉन्संट्रेशन : हाई स्केल मैन्युफ़ैक्चरिंग और क्वालिटी स्टैंडर्ड के कारण इस इंडस्ट्री में कंपनियों के पास आमतौर पर सीमित कस्टमर बेस होता है. इसलिए, भविष्य की ग्रोथ के लिए उनके साथ मज़बूत रिश्ते बनाए रखना ज़रूरी है. कस्टमर रिटेंशन रेशियो और कस्टमर के साथ लंबे अर्से के लिए जुड़ना, कस्टमर के साथ मज़बूत संबंधों के बड़ा संकेत हैं.

मिसाल के लिए, साइएंट DLM के ख़ास कस्टमर FY23 तक 11 सालों से ज़्यादा वक़्त से इसके साथ जुड़े हुए है.

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हालांकि, सीमित कस्टमर बेस से कॉन्सनट्रेटेड रेवेन्यू सोर्स (आय के गिने-चुने स्रोत) हासिल हो सकते हैं. इसका मतलब ये है कि कुछ ही कस्टमर ज़्यादतर रेवेन्यू का ज़रिया होते हैं. इस तरह की इंडस्ट्री में ये बहुत आम है, और इसकी वजह से, उनकी व्यापार से मिलने वाली राशि (Trade receivables) भी ज़्यादा होती है. मिसाल के लिए, Cyient DLM के सबसे बड़े पांच कस्टरमरों ने FY23 में रेवेन्यू में 65 फ़ीसदी से ज़्यादा का योगदान दिया. किसी भी ख़ास कस्टमर के खोने से कंपनी पर काफ़ी असर पड़ सकता है.

  • कम मार्जिन और प्राइसिंग का दबाव : इस इंडस्ट्री में कंपनियां आमतौर पर कम मार्जिन पर काम करती हैं. ऐसा इसलिए, क्योंकि वो कस्टमर ब्रांड के लिए कॉन्ट्रेक्ट पर मैन्युफ़ैक्चर करते हैं. जिसका नतीजा होता है कि मोलभाव करने की ताक़त कम हो जाती है. हालांकि, ये इस पर भी निर्भर करता है कि कंपनियां किस तरह की सेवाएं दे रही हैं. अगर कोई कंपनी ODM के तौर पर काम करती है, तो मार्जिन उम्मीद से ज़्यादा होता है क्योंकि वे कस्टमर को एंड-टू-एंड समाधान देते हैं. हालांकि, क्योंकि भारत में ज़्यादातर कंपनियां EMS हैं, उन पर क़ीमत तय करने का दबाव देखा जाता है, जिसका उनके मार्जिन पर असर पड़ता है.

रेवेन्यू के लिए निर्भरता

FY22 में DCX सिस्टम्स के सबसे बड़े कस्टमर मिलने वाला रेवेन्यू क़रीब 56% था

कम्पनी टॉप पांच कस्टमर से कंपनी का रेवेन्यू (FY22) टॉप पांच कस्टमर से कंपनी का रेवेन्यू (FY22) रेवेन्यू के % के तौर पर ट्रेड रिसीवेबल्स (FY23)
एवलॉन टेक्नोलॉजीज़ 49.7 64.6 17.5
साइएंट DLM 65.4 93.2 14.6
DCX सिस्टम 80.6* 99.7 26.2
एलिन इलेक्ट्रॉनिक्स 63.2 77.1 26.9
कायन्स टेक्नोलॉजीज 37.2 51 16

हालांकि, कम मार्जिन ख़राब बिज़नस नहीं हो जाते. जबकि हाई मार्जिन आकर्षक होता है, पर किसी को कंपनियों को देखते समय एसेट टर्नओवर (sales generated per unit of assets) और फ़ाइनेशियल लेवेरज (leverage results from using borrowed capital, trade payables, etc., to generate returns) को भी देखना चाहिए.

मिसाल के लिए, EMS की दिग्गज कंपनी डिक्सन टेक को ले लीजिए. कंपनी, जो ख़ास तौर से मोबाइल फ़ोन की मैन्यूफ़ैक्चरिंग के ज़रिए रिवेन्यू पैदा करती है, उसका तीन साल का एवरेज नेट प्रॉफ़िट मार्जिन सिर्फ़ 2.1 फ़ीसदी है. हालांकि, इसका एसेट क़ारोबार और फ़ाइनेंशियल लेवेरज, क्रमशः 2.9 और 3.9 गुना था. परिणामस्वरूप, कंपनी 23 फ़ीसदी की मज़बूत ROE रिपोर्ट करती है.

DuPont ROE: तीन साल की एवरेज (FY21-23)

कम मार्जिन के बावजूद, हाई फ़ाइनेंशियल लेवरेज के कारण ज़्यादातर कंपनियों का ROE हाई है

कंपनी नेट प्रॉफ़िट मार्जिन (%) एसेट टर्नओवर (गुना) फ़ाइनेंशियल लेवरेज (गुना) इक्विटी पर रिटर्न (%)
डीसीएक्स सिस्टम 5.4 1.1 12.3 64.4
एवलॉन टेक्नोलॉजीज़ 5.6 1.4 6.2 50.3
साइएंट डीएलएम 3.7 1 12.9 43.2
डिक्सन टेक्नोलॉजीज़ 2.1 2.9 3.9 23.1
कायन्स टेक्नोलॉजी 5.6 1.2 2.7 16.3
सिर्मा एसजीएस टेक्नोलॉजीज़ 5.9 1.1 2.2 13.9
एलिन इलेक्ट्रॉनिक्स 3.4 1.9 1.8 11.8
अंबर एंटरप्राइजेज 2.6 1.1 2.7 7.3
  • कस्टमर के बिज़नस पर निर्भरता : कस्टमर आमतौर पर प्रॉडक्ट को उस ब्रांड के आधार पर याद करते हैं जो इसे बेच रहा है (EMS कंपनियों के कस्टमर) न कि मैन्यूफ़ैक्चर के नाम के आधार पर. परिणामस्वरूप, इन कंपनियों का बिज़नस आम तौर पर कस्टर के बिज़नस को प्रभावित करने वाले फ़ैक्टर, जैसे प्रतिष्ठा और मांग, पर निर्भर करता है मिसाल के लिए, अगर Xiaomi फ़ोन की मांग घटने लगती है, तो इसका असर डिक्सन टेक्नोलॉजीज़ के ऑपरेशन पर पड़ेगा क्योंकि ये उनके लिए फ़ोन बनाती है.

निष्कर्ष
EMS सेक्टर की कंपनियों पर विचार करते समय, कंपनियों द्वारा दी की जाने वाली सेवाओं के प्रकार और उनके कस्टमर की क्वॉलिटी का मूल्यांकन करना ज़रूरी है इसके अलावा, कच्चे माल के लिए इंडस्ट्री की चीन पर निर्भरता चिंता का सबब बनी हुई है.

हालांकि EMS इंडस्ट्री ग्रोथ के रास्ते पर है, लेकिन सभी कंपनियां अच्छे निवेश के लायक़ नहीं हो सकती है. इसलिए, पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे निवेश करने से पहले ज़रूरी रिसर्च कर लें. EMS इंडस्ट्री की बुनियादी गतिशीलता को समझना निवेश संबंधी फ़ैसले लेने के लिए ज़रूरी है.

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