इंटरव्यू

“स्मॉल कैप में हम देखते हैं कि क्या स्टॉक 3-4 साल में दोगुना हो सकता है”

Bandhan AMC के इक्विटी प्रमुख मनीष गुनवानी से ख़ास बातचीत

“स्मॉल कैप में हम देखते हैं कि क्या स्टॉक 3-4 साल में दोगुना हो सकता है”

इस साल की शुरुआत में बंधन AMC में इक्विटी प्रमुख के तौर पर मनीष गुनवानी की एन्ट्री, उसकी इक्विटी स्कीम्स के शानदार टर्नअराउंड होने से कम नहीं रहा है. उनके साथ ख़ास बातचीत में, हमने बंधन में उनके द्वारा किए गए बदलावों को समझने की कोशिश की. साथ ही, जाना कि उन्होंने अपने इक्विटी फ़ंड्स के प्रदर्शन में कैसे सुधार किया और उनकी निवेश की पूरी रणनीति में कैसे बदलाव किया. इसके अलावा, मार्केट की वर्तमान स्थितियों के संबंध में भी उनके विचार जाने. बातचीत के मुख्य अंश:

आपके कार्यभार संभालने के बाद बंधन कोर इक्विटी फ़ंड और बंधन स्मॉल कैप फ़ंड अपनी कैटेगरी के टॉप फ़ंड्स के पहले क्वार्टाइल में चले गए. आपने ख़ास तौर से स्मॉल कैप फ़ंड के ख़राब प्रदर्शन को कैसे उलट दिया?
मोटे तौर पर पर, एक अनुभवी रिसर्च टीम से हमें बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिली है, जिससे हम शेयरों का बड़ा कवरेज कर पाए हैं. ख़ासतौर से इस साल, फ़ंड ने एनर्जी ट्रांज़िशन और पावर कैपेक्स, फ़ार्मा, ऑटो, रियल एस्टेट जैसी थीम में भागीदारी की है, जिससे प्रदर्शन अच्छा करने में मदद मिली.

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इस साल बाज़ार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. अब, जब हम इस मौद्रिक सख्ती के साइकल के अंत की ओर जाते दिख रहे हैं, तो वैश्विक बाज़ारों की तुलना में निकट भविष्य में घरेलू इक्विटी पर आपका क्या नज़रिया है?

बाज़ार के निकट भविष्य के लिए टेक्निकल इंडिकेटर बहुत भरोसे वाले नहीं हैं, जिनमें हाल के हाई रिटर्न, ग्लोबल लेवल पर क्रेडिट स्प्रेड में कमी, कम अस्थिरता आदि शामिल है. हालांकि, मीडियम टर्म में, भारत के मज़बूत फ़ंडामेंटल्स के अलावा, लिक्विडिटी की स्थिति भी मज़बूत नज़र आती है. इनमें डॉलर के नरम रहने की उम्मीद, इमर्जिंग मार्केट्स में फ़्लो के लिए कॉम्पीटिशन ज़्यादा न होना, बॉन्ड इंडेक्स में इनक्लूज़न, सर्विस एक्सपोर्ट के कारण भारत के करंट अकाउंट में ढांचागत सुधार आदि शामिल हैं.

इस तरह, मीडियम से लॉन्ग टर्म में भारत के शेयर बाज़ार के ग्लोबल कैपिटल मार्केट में एक चमकता सितारा बनने की संभावना है.

आपने हाल में ज़ोमैटो और पेटीएम में निवेश किया है. न्यू एज बिज़नस में आपकी दिलचस्पी कैसे जगी?

भारत में ज़्यातर ग्रोथ स्टॉक्स को, अगर डिस्काउंटेड कैश फ़्लो एनालिसिस (जो शेयरों के वैल्युएशन के लिए मुख्य बुनियादी तरीक़ा है) के नज़रिए से देखा जाए, तो उनकी ज़्यादातर वैल्यू अगले 10 साल के बाद कैश फ़्लो से हासिल होगी. उस संदर्भ में, मौजूदा साल के मुनाफ़े बहुत ज़्यादा औचित्य नहीं है और इसलिए, एक नियम के तौर पर घाटे में चल रहे स्टॉक को नज़रअंदाज़ किए जाने का हम समर्थन करते हैं. हालांकि, घाटे में चल रहे शेयरों को सुरक्षा के पर्याप्त मार्जिन के साथ ख़रीदना साफ़ तौर से महत्वपूर्ण है, ताकि रिटर्न उठाए जा रहे जोख़िम के अनुरूप हो.

आप मिड और स्मॉल-कैप स्पेस में शेयर कैसे चुनते हैं?

जैसे-जैसे आप कम मार्केट कैपिटलाइज़ेशन की ओर बढ़ते हैं तो आम तौर पर, लिक्विडिटी का रिस्क बढ़ता जाता है, इसलिए सोच-विचार से संबंधित प्रोसेस मीडियम से लॉन्ग टर्म में बेंचमार्क ओरिएंटेश से कुल रिटर्न की ओर बढ़ती जाती है. टार्गेट रिटर्न के नज़रिए से, स्मॉल कैप में, हम अक्सर ये मूल्यांकन करना पसंद करते हैं कि क्या स्टॉक तीन-चार सालों में दोगुना हो सकता है. इसके अलावा भी कई बातों पर ग़ौर करने की ज़रूरत है.

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