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जीत सबकी होती है

स्पोर्ट्स की बात और है, निवेश में ज़रूरी नहीं कि किसी की जीत के लिए किसी को हारना ही हो

जीत सबकी होती हैAnand Kumar

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5:49

जैसा कि चलन है, मैं इस कॉलम को क्रिकेट की बात से शुरू करूंगा. कई साल पहले, जब एडम गिलक्रिस्ट किसी IPL टीम के कैप्टन थे, तो मैच शुरू होने से पहले एक टीवी प्रेज़ेंटर ने उनसे ये घिसा-पिटा सवाल पूछा, "तो आपको क्या लगता है इस पिच पर कितने रन काफ़ी होंगे?". गिलक्रिस्ट, जो मूर्खता को आसानी से बर्दाश्त नहीं करते हैं, बोले "दोस्त, मेरे ख़याल से दूसरे के मुक़ाबले एक ज़्यादा." जैसा कि हर भारतीय क्रिकेट फ़ैन इस दर्द को जानता ही है कि जीत या हार हर खेल का हिस्सा होता है. अंत में चाहे 'क्रिकेट की जीत' का मन-भावन नारा कितना भी लगाया जाए, हर कोई जानता है कि कौन जीता और कौन हारा.

हमें बातों में खेल की मिसालें देना या मैटाफ़ोर का इस्तेमाल कितना भी पसंद हो, पर निवेश खेल की तरह नहीं है. एक निवेशक के तौर पर, किसी की जीत के लिए किसी का हारना, ज़रूरी नहीं है. अगर आप अपने फ़ाइनेंशियल गोल को पूरा करते हैं, तो आप जीत जाते हैं, साथ ही दूसरे लोग भी जीत जाते हैं, जिन्होंने उन्हें पूरा किया है. हर कोई जीत सकता है.

विज्ञापन की दुनिया की एक पुरानी कहावत है, जो अब भुला दी गई है, "जब कोई कस्टमर क्वार्टर-इंच की ड्रिल ख़रीदने आता है, तो उसे एक क्वार्टर-इंच का छेद करना होता है." हम कभी-कभी म्यूचुअल फ़ंड की तकनीकी बातों में खो जाते हैं, लेकिन निवेशक उन चीज़ों के लिए पैसे की तलाश में रहते हैं जो वो जीवन में करना चाहते हैं. एक घर ख़रीदना, अपने बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा, एक आरामदायक रिटायरमेंट का जीवन, और अपने परिवार के लिए एक बड़ी विरासत छोड़ना लोगों के वास्तविक लक्ष्य हैं, किसी प्रतियोगिता में किसी तरह की 'जीत' हासिल करना नहीं.

अजीब बात है कि कई निवेशक जीत के लिए मनगढ़ंत पैमाने गढ़ते हैं और उन पर खरे नहीं उतरने पर उसे समस्या मान बैठते हैं. सबसे आम बात, जो म्यूचुअल फ़ंड और इक्विटी निवेशकों दोनों को प्रभावित करती है, वो ये कि उन्होंने जो निवेश चुना है, उसका रिटर्न प्रतिस्पर्धियों की तुलना में ज़्यादा होना चाहिए. इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि उनका निवेश कितना अच्छा प्रदर्शन करता है, अगर कोई दूसरा फ़ंड या स्टॉक कुछ बेहतर प्रदर्शन करता है तो ये हार हो जाती है. सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वालों के साथ अपने रिटर्न की तुलना की चाहत समझ में आती है लेकिन ये किसी काम की नहीं है. सच तो ये है कि कोई भी चीज़ साल-दर-साल लगातार टॉप पर नहीं रहती. इस समय के सबसे हॉट इन्वेस्टमेंट का पीछा करना हाई प्राइस पर ख़रीदने और कम प्राइस पर बेचने वाला तरीक़ा है. ये तब तक अपना काम कर रहा है जब तक आपका पोर्टफ़ोलियो आपकी फ़ाइनेंशियल प्लानिंग मुताबिक़ ठोस लॉन्ग-टर्म रिटर्न दे रहा है. असल बात है शोर और काल्पनिक उम्मीदों पर क़ाबू पाना. इसके बजाय, अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करें और अपने पोर्टफ़ोलियो को समय के साथ उन लक्ष्यों के लिए लगातार काम करने दें. निवेश में, किसी जोड़-तोड़ से फ़र्स्ट आने पर कोई पदक नहीं मिलता. एकमात्र रेस जो मायने रखती है उसमें सिर्फ़ आप ही हैं.

ये सोचना कि निवेश एक ज़ीरो-सम गेम है जहां आपके जीतने के लिए किसी को हारना होगा, एक नुक़सानदायक मिथक है. क्योंकि ये कोई खेल है ही नहीं. बल्कि, ये तो एक ऐसा ज़रिया है, जिसका सही तरीक़े से इस्तेमाल करने पर, सभी निवेशकों को उनके फ़ाइनेंशियल गोल हासिल करने में मदद मिल सकती है. जब भी कोई निवेश अच्छा प्रदर्शन करता है, तो इससे हरेक को फ़ायदा होता है, न कि केवल कुछ चुनिंदा लोगों को. इसी तरह, लॉन्ग-टर्म में मार्केट की बड़ी ग्रोथ समंदर के ज्वार की तरह है जो सभी नावों को अपने साथ ऊपर उठा देती है. आपके निवेश की सफलता के लिए किसी और की विफलता की ज़रूरत नहीं है.

एक और समस्या तब होती है जब कोई ये फ़ैसला लेता है कि वो जीत से चूक गया है, उसे कुछ मिलना चाहिए था, लेकिन किसी ग़लती या भूल के कारण ऐसा नहीं हो सका. इन स्थितियों में, सही बात ये होगी कि समस्या को स्वीकार किया जाए - अगर कोई समस्या है - और अगर ज़रूरी हो, तो दोबारा प्लान बनाएं.

हालांकि, मानसिक रूप से निवेशक इस स्थिति को स्वीकार नहीं कर पाते. वो उस पैसे को हासिल करने के लिए, जो उन्हें लगता है उनका है, ज़्यादा आक्रामक हो जाते हैं और बढ़े हुए जोख़िम वाली रणनीतियां अपनाने लगते हैं. ये रवैया भी मुसीबत बुलाने का एक नुस्ख़ा है.

अपने निवेश के असली लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखें, और ये लक्ष्य है - अपना और अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित करना. हर रोज़, बाज़ार के शोर और अटकलों पर ध्यान न दें कि कौन 'जीत रहा है' और कौन 'हार' रहा है. आप धीरज के साथ और एक डाइवर्सिफ़ाइड पोर्टफ़ोलियो के साथ दशकों तक लगातार पैसा बना सकते हैं - एक शांत और सकारात्मक मन के साथ अपना निवेश करें, न कि प्रतिकूल मनःस्थिति के साथ. आपकी आख़िरी प्रतिस्पर्धा ख़ुद आपसे है - क्या आप अपने लॉन्ग-टर्म गोल को पाने के लिए बाज़ार का असरदार तरीक़े से इस्तेमाल कर रहे हैं? अगर हां, तो आप जीत रहे हैं, भले ही आपके आस-पास के दूसरे लोग कुछ भी कर रहे हों.

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