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क्रांति अब भी जारी है

'कैसे' से लेकर 'क्या' और 'क्यों' तक

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साल 1991 में अपनी मास्टरगेन म्यूचुअल फ़ंड स्कीम के IPO के दौरान, (तब के) यूनिट ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया ने ₹1.45 लाख करोड़ इकट्ठे किए थे. मैं शर्त लगा सकता हूं कि आप ये नंबर देख कर चौंक गए होंगे और लगा होगा कि धीरेंद्र बातें बना रहे हैं. आप सही हैं, मगर पूरी तरह से नहीं. मैं बात बना ज़रूर रहा हूं, पर इस आंकड़े का आधार है.

जब मास्टरगेन लॉन्च किया गया था, तब सेंसेक्स क़रीब 1,800 प्वाइंट्स पर था, और UTI ने इसके ज़रिए ₹4,472 करोड़ इकट्ठा किए थे. आज, सेंसेक्स 64,500 प्वाइंट्स के आस-पास है. यानी, इक्विटी के प्राइस की ग्रोथ के अनुपात में, मास्टरगेन का कलेक्शन ₹1.45 लाख करोड़ के बराबर हुआ. ये एक क्लोज़-एंड फ़ंड था और लॉन्च के समय एप्लीकेशन जमा करना ही इसमें निवेश का एकमात्र तरीक़ा था. कोई अचरज की बात नहीं कि UTI को 65 लाख एप्लीकेशन मिलीं. आज, तीन दशकों के बाद भी, ये आंकड़ा ग़ज़ब का लगता है.

अहम सवाल ये है कि ऐसा क्यों हुआ? लोग इस फ़ंड में निवेश करने के लिए इतने बेताब क्यों थे? इसका जवाब आसान है. ये हर्षद मेहता के शुरू किए बुल रन का दौर था, और तब स्टॉक में निवेश को लेकर लोग बड़े उतावले थे. एक आम रिटेल निवेशक के निवेश नहीं कर पाता था, इस बात ने भी आग में घी का काम किया था! उस समय का मार्केट एक बंद सा सिस्टम हुआ करता था, स्टॉकब्रोकरिंग एक रैकेट होता था, और किसी आम शख़्स के साथ ब्रोकर का व्यवहार उस तरह का नहीं होता था जैसा एक कस्टमर के साथ होना चाहिए.

इस सबके कई कारण रहे, पर अब ये सब पुराने इतिहास का हिस्सा हो चुका है. अहम बात ये है कि इक्विटी निवेश को लेकर एक बड़ी डिमांड मौजूद थी, और उस वक़्त, मास्टरगेन इस मांग को पूरा करने के चंद मौक़ों में से था.

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आप समझते ही होंगे कि ये 65 लाख फ़ॉर्म पेपर फ़ॉर्म थे जिनके लिए लोगों ने कतारें लगाईं, फ़ॉर्म ख़रीदे और फिर उन्हें ख़ुद जा कर जमा किया. ज़्यादातर बैंकिंग के काम, चेक का क्लियर होना, स्टेटमेंट के रिकार्ड, यूनिट ट्रांसफ़र जैसी चीज़ें, पेपर पर होती थीं जिन्हें मैनुअली किया जाता था. कई निवेशकों की लंबे समय से चली आ रही शिकायतें थीं क्योंकि रिकॉर्ड ग़लत थे, सिग्नेचर नहीं मिलते थे और इसी तरह की तमाम समस्याएं थीं. मुझे ये पता है क्योंकि मैं भी इन लोगों में से था!

जब म्यूचुअल फ़ंड इनसाइट का पहला अंक 2002 में छपा, तब भी चीज़ें उतनी अलग नहीं थीं. ज़्यादातर म्यूचुअल फ़ंड निवेशकों के लिए तो चीज़ें तब भी नहीं बदली थीं, जब 10वां एनिवर्सरी अंक छपा.

म्यूचुअल फ़ंड्स में डिजिटलाइज़ेशन देर से आया, पर अब, ये मौजूद है. ज़्यादातर डिजिटल इंफ़्रास्ट्रक्चर म्यूचुअल फ़ंड के बाहर का है, जैसे आधार, इंटरनेट बैंकिंग और UPI, पर इस सबने मिल कर फ़ंड निवेशकों के लिए चीज़ों को आसान करने के लिए ल्यूब्रिकेशन का काम किया है.

किसी भी बड़े क्रांतिकारी बदलाव के लिए बहुत सी परिस्थितियों को एक साथ आना पड़ता है. और, क्रांति करने वालों को ख़ुद इस बात का एहसास होने की ज़रूरत होती है कि अब परिस्थितियां सही हैं, और उन्हें आगे बढ़ने और उस पर अमल करने की ज़रूरत है.

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सवाल ये है कि एक म्यूचुअल फ़ंड निवेशक के तौर पर क्या आप नए क्रांतिकारी तरीक़े को अपनाने के लिए तैयार हैं? मैं ये सवाल इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि हमने पहले जिसकी बात की है वो निवेश के 'कैसे' वाले सवाल का हिस्सा है और 'क्या' वाले का नहीं. निवेश करने का तरीक़ा सरल और भरोसेमंद हो गया है जिसमें किसी दूसरे पर निर्भर होने की ज़रूरत नहीं है. आप सीधे किसी कंप्यूटर या फ़ोन से ट्रांज़ैक्शन कर सकते हैं, फ़ंड में निवेश कर सकते हैं, उन्हें रिडीम कर सकते हैं या सीधे कोई एक्शन ले सकते हैं जिसमें ऐसे किसी भी शख़्स के शामिल होने की ज़रूरत नहीं है जिसके इरादे आपके इरादों से अलग हों.

आज चाहे आपको लगे कि तब आप कोई भी निवेश कर सकते थे, पर असलियत ये है कि आपके पास बहुत थोड़ी आज़ादी थी. किसी को बताना होता था कि निवेश करने के लिए आपको क्या करना होगा. ये व्यक्ति किसी संस्थान का हो सकता था, जैसे बैंक या कोई शख़्स जिसका धंधा फ़ाइनेंशियल प्रोडक्ट बेचने का था. आप कहां निवेश करेंगे इसे लेकर आपके पास जानकारी पाने का कोई इंडिपेंडेंट तरीक़ा नहीं था.

हालांकि, इसका सबसे ख़राब पहलू ये था कि आप अपने निवेश को लेकर क्या करें, इसके लिए आपको पूरी तरह से बेचने वाले पर निर्भर रहना होता था. और बेचने वाले सिर्फ़ प्रोडक्ट बेचते हैं, पर निवेश की प्रक्रिया को आपसे शुरू होकर आप पर ही ख़त्म होना होता है, आपकी फ़ाइनेंशियल ज़रूरतें, और जिस दिशा में आपकी ज़िंदगी जाएगी ये फ़ैक्टर इसका आधार होते हैं.

म्यूचुअल फ़ंड निवेश के बारे में सीखना, निवेश का चुनाव, और लेन-देन आसान और तेज़ होना चाहिए, जिसमें कम-से-कम मुश्किलें हों. इस तरह की पहुंच के ज़रिए आने वाले निवेश का लोकतंत्रीकरण निवेश की पूरी गतिविधि पर बड़ा परिवर्तनकारी असर डाल सकता है.

इन बदलावों ने 'कैसे' का ख्याल तो रख लिया है. हम 'क्या' और 'क्यों' को लेकर आपकी मदद के लिए यहां मौजूद हैं.

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धनक साप्ताहिक

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