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अजब विश्वास की ग़ज़ब दुनिया

'BaapOfChart' पर सेबी की कार्यवाही ने स्टॉक्स और मार्केट को लेकर निवेशकों के अजीबोग़रीब मान्यताओं को उजागर कर दिया है

अजब विश्वास की ग़ज़ब दुनियाAnand Kumar

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5:25

कुछ दिन पहले, मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने 'बाप ऑफ़ चार्ट' नाम के एक ऑनलाइन ब्रांड चलाने वालों पर अंतरिम आदेश पास किया. इस आदेश में उस शख़्स और उसके असोसिएट्स को सिक्योरिटीज़ मार्केट से जुड़े किसी भी काम में हिस्सा लेने पर रोक लगा दी गई. इस पूरी एक्टिविटी से मिले पैसे जिस बैंक अकाउंट में जमा हो रहे थे उसे भी फ़्रीज़ कर दिया गया. आदेश में माना गया कि ये लोग दो साल से, बिना रजिस्ट्रेशन के एक इन्वेस्टमेंट एजुकेटर के चोले में इन्वेस्टमेंट एडवाइज़र बने हुए थे और इन्होंने अपने 'स्टूडेंट्स' से ₹17.2 करोड़ इकट्ठा किए. हालांकि, ये साफ़ नहीं हो सका कि कितना पैसा फ़्रीज़ किया गया है.

केस के डिटेल देखेंगे तो ये अपने-आप में काफ़ी सामान्य लगेंगे. दिलचस्प ये है कि अतिशयोक्ति से भरे स्टारडम और सेलिब्रिटी होने की हवा एक अपराधी के आस-पास बनाई गई. ये दिखाता है कि निवेशक और इसका निशाना बनने वाले लोग किस तरह के थे. जिस किसी ने भी इस पर्सनल ब्रांड, 'बाप ऑफ चार्ट' को चुना और उसका प्रचार किया, वो ऐसे निवेशक की तलाश में तो नहीं रहे होंगे जो द इकोनॉमिक टाइम्स पढ़ता हो या वैल्यू रिसर्च ऑनलाइन देखता हो. कम-से-कम मुझे तो ऐसी ही उम्मीद है. मेरी बात का मतलब समझने के लिए आप यूट्यूब चैनल पर कुछ वीडियो देख सकते हैं.

अगर आप पूरी बात समझना चाहते हैं तो यूट्यूब पर हाल की कुछ टिप्पणियां पढ़ें, यानी, जो सेबी के प्रतिबंध के बाद 'बाप' के फ़ॉलोअर्स ने की हैं. इनमें से कुछ लोग सेबी के साथ-साथ यूट्यूब को भी इस व्यक्ति को उन्हें लूटने की इजाज़त देने के लिए दोषी ठहरा रहे हैं. और कुछ, सेबी को ऐसे महान व्यक्ति पर प्रतिबंध लगाने के लिए दोषी ठहरा रहे हैं जो जनता को अमीर बनने के तरीक़े सिखा रहा था. बाद वालों की आम सोच है कि ये दूसरों को अमीर बनने से रोकने के लिए अमीरों और ताक़तवर लोगों की एक साज़िश है. कुल मिलाकर, इस चैनल के कमेंट्स, आपके और मेरे तरीक़े से निवेश करने वालों के लिए पागलपन से भरी वैकल्पिक दुनिया जैसे लगते हैं.

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यहां मूल समस्या है कि इनमें से बहुत से लोग नहीं समझते कि शेयर बाज़ार क्या है. मेरे कहने का मतलब ये नहीं कि ये सवाल स्पष्ट नहीं - कि ये ऐसी जगह है जहां लोग ब्रोकरों के ज़रिए ट्रेड की जाने वाली सिक्योरिटीज़ ख़रीदते और बेचते हैं. मगर असल सवाल ये है कि लोग क्या सोचते हैं कि स्टॉक असल में कैसे काम करते हैं? क़ीमतें कैसे तय होती हैं इसे लेकर उनका मनोवैज्ञानिक मॉडल क्या है? एक वक़्त था जब दो तरह के मॉडल आम हुआ करते थे, एक 'टिप' मॉडल और दूसरा 'ऑपरेटर' मॉडल. टिप मॉडल बस इतना सा था कि कुछ ऐसे लोग हैं जिनके पास भीतर की जानकारी होती है, और अगर वो आपको ये भीतर की बातें बता दें, तो आप कमाई कर सकते हैं. ऑपरेटर मॉडल भी ऐसा ही है लेकिन इसके मानने वाले समझते हैं कि कुछ ऐसी रहस्यमयी संस्थाएं हैं जो स्टॉक की क़ीमतों का उतार-चढ़ाव मैनेज करती हैं.

पर ये मॉडल अब पुराने हो चले हैं. अब तो टेक्नोलॉजी और AI और न जाने किन-किन चीज़ों का युग है, इसलिए इसमें एक तीसरा मॉडल भी जुड़ गया है. इस नए मॉडल के मुताबिक़ कुछ जीनीयस ऐसे हैं जिनके पास बाज़ारों की गहरी टेक्निकल समझ, और शानदार टेक्निकल टूल्स हैं जो ये पता लगा सकते हैं कि बाज़ार में क्या चल रहा है. इसके अलावा, ये जीनियस लोग इतने दयालु हैं कि ₹1,500 से ₹12,000 की मामूली रक़म के लिए किसी को भी ये रहस्य ऑनलाइन सिखा देंगे. यहां दी गई रक़म प्रामाणिक हैं क्योंकि मैंने इन्हें सेबी के आदेश से लिया है, जो बाप और उसके सहयोगियों को पेमेंट गेटवे के ज़रिए मिले असल के पेमेंट पर आधारित है.

क्या ऐसे लोग असल में होते हैं जो इस पर विश्वास करेंगे? वो व्यक्ति जिसके पास तेज़ी से बहुत सारा पैसा बनाने का रहस्य है, क्या वो चंद हज़ार रुपयों के लिए ऑनलाइन कोर्स कराता फिरेगा? जो भी ऐसा मानता है वो शायद मुश्किल तरीक़े से ही सीखने के क़ाबिल है, और उस मुश्किल तरीक़े की व्यवस्था बनाने में इस 'बाप' ने मदद की है जिसमें कहीं-न-कहीं सेबी से भी मदद मिली है.

सच तो ये है कि क़ारगर होने वाले एकमात्र मनोवैज्ञानिक मॉडल को वास्तविकता से संचालित होना होगा. ये एक मुश्किल काम लगता है, लेकिन इसकी ख़ूबी है कि समय के साथ ये आसान होता जाता है. किसी न किसी 'बाप' को फ़ॉलो करना (और भी बहुत से हैं) इसका ठीक उलटा है - जो शुरुआत में आसान लगता है, लेकिन समय बीतने के साथ, मुश्किल होता जाता है.

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