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IPO मार्केट हुआ गुलजार, क्या आपको करना चाहिए निवेश?

यहां पर 4 IPOs से जुड़ा अहम डेटा दिया जा रहा है, जिससे आपके लिए तस्वीर काफ़ी हद तक साफ हो सकती है

IPO मार्केट हुआ गुलजार, क्या आपको करना चाहिए निवेश?

IPO: निफ़्टी के पहली बार 20,000 के अंक से ऊपर पहुंचने के साथ ही प्राइमरी मार्केट भी गुलजार नजर आ रहा है. इस सप्ताह 4 कंपनियां अपने इशू के ज़रिये लगभग ₹4,670 करोड़ जुटाने के लिए तैयार हैं. वहीं, ₹3,000 करोड़ के IPO अगले सप्ताह लॉन्च हो सकते हैं. इस सप्ताह की लिस्ट में कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल कंपनी आर आर काबेल (R R Kabel), जैगल प्रीपेड ओशन सर्विसेज (Zaggle Prepaid Ocean Services), सामी होटल्स (SAMHI Hotels) और EMS का नाम शामिल हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि निवेशकों को इन IPO को निवेश का मौका मानना चाहिए? हम यहां कुछ प्रमुख IPO के बारे में बता रहे हैं. निवेशकों को निवेश के लिए अपना मन बनाने से पहले इस पर ज़रूर करना चाहिए.

इनके बीच पूंजी जुटाने की होड़

IPO साइज़ (करोड़ ₹) सब्सक्रिप्शन डेट
आर आर काबेल 1964 13-15 सितंबर, 2023
सामी होटल्स 1370 14, 15 और 18 सितंबर, 2023
जैगल प्रीपेड ओसीन सर्विसेज 563 14, 15 और 18 सितंबर, 2023
EMS 321 8, 11 और 12 सितंबर, 2023

आर आर काबेल

कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल कंपनी आर आर काबेल ने अपना IPO लॉन्च कर दिया है. कंपनी भारत में अपने सेक्टर की अग्रणी कंपनियों में से एक है. ये दो सेगमेंट वायर और केबल (इनसे लगभग 90 फ़ीसदी रेवेन्यू आता है) और फैन और लाइटिंग (10 फ़ीसदी) जैसे फास्ट मूविंग इलेक्ट्रिकल गुड्स बेचती है. फ़ाइनेंशियल ईयर 2023 में कंपनी वैल्यू के लिहाज से 7 फ़ीसदी मार्केट शेयर के साथ ब्रांडेड वायर और केबिल मार्केट में भारत की 5वीं सबसे बड़ी कंपनी है. जानिए उससे जुड़ी अहम बातें...

आर आर काबेलः फ़ाइनेंशियल हिस्ट्री

प्रमुख आंकड़े 2 साल की ग्रोथ (% प्रति वर्ष) TTM जून 23 FY23 FY22 FY21
रेवेन्यू (करोड़ ₹) 43.4 5961 5599 4386 2724
EBIT (करोड़ ₹) 19 334 263 257 185
PAT (करोड़ ₹) 18.4 246 190 214 135
नेट वर्थ (करोड़ ₹) 1495 1390 1237 1033
कुल कर्ज (करोड़ ₹) 473 580 533 507
EBIT यानी अर्निंग्स बिफोर इंटरेस्ट और टैक्स
PAT यानी प्रॉफ़िट आफ्टर टैक्स
TTM यानी पिछले 12 महीने में.

क्वालिटीः R R Kabel का तीन साल के एवरेज ROE और ROCE क्रमशः 15.6 और 15.5 फ़ीसदी हैं. जून, 2023 में समाप्त 12 महीने के दौरान ROE और ROCE क्रमशः 17.9 फ़ीसदी और 20.1 फ़ीसदी रहे हैं.

ग्रोथः फ़ाइनेंशियल ईयर 2021 और 2023 के बीच उसका टॉपलाइन और PAT सालाना 43.4 फ़ीसदी और 18.4 फ़ीसदी की दर से बढ़ा है.

वैल्युएशनः स्टॉक का P/E और P/B क्रमशः 47.4 और 7 गुने पर कारोबार करेगा. इसके विपरीत उसकी जैसी दूसरी कंपनियों के लिए क्रमशः 53.3 और 8.5 गुना मीडियन और एवरेज है.

उम्मीदेंः कंपनी रियल एस्टेट सेक्टर, रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन में जारी ग्रोथ और इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते पब्लिक और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट से मिलने वाले अवसरों का फ़ायदा उठाने के लिए उत्साहित है.

ताकत
बड़ा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क:
आर आर काबेल की 3,450 डिस्ट्रीब्यूटर्स, 3,656 डीलर्स और 1,14,851 रिटेल सेलर्स (जून 2023 तक) के साथ देश भर में मौजूदगी है. ये इलेक्ट्रीशियन के सबसे बड़े नेटवर्क में से एक है, जिसमें पूरे भारत के 2,98,084 इलेक्ट्रीशियन शामिल हैं (जून 2023 तक).

अग्रणी निर्यातक: तारों और केबल्स के निर्यात में कंपनी का लगभग 9 फ़ीसदी मार्केट शेयर है.

कमजोरियां
कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव:
कंपनी की कच्चे माल की कुल कॉस्ट में कॉपर और एल्युमीनियम कंपनी की लगभग 82 फ़ीसदी (फ़ाइनेंशियल ईयर 2023 तक) हिस्सेदारी है. कीमतों में उतार-चढ़ाव और इन धातुओं की आपूर्ति में अनिश्चितता उसके बिज़नस के लिए हानिकारक हो सकती है.

नकली उत्पाद: उससे अलग पक्षों के द्वारा कंपनी की ब्रांडिंग का इस्तेमाल करके बेची जाने वाली वस्तुओं से कंपनी के लिए पैदा प्रतिस्पर्धा से उसे नुकसान हो सकता है.

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जैगल प्रीपेड ओशन सर्विसेज

Zaggle Prepaid Ocean Services IPO: जैगल प्रीपेड ओशन सर्विसेज, 2011 में बनी एक फ़िनटेक कंपनी है जो B2B2C बिज़नस मॉडल का पालन करती है. कंपनी ख़र्च के मैनेजमेंट से जुड़े सेग्मेंट के तहत काम करती है, जिसमें अपने बैंकिंग भागीदारों के माध्यम से प्रीपेड कार्ड जारी करने के साथ-साथ पेबल्स, पेरोल और टैक्स प्रोसेसिंग के लिए सॉफ्टवेयर सॉल्युशन शामिल हैं. फ़ाइनेंशियल ईयर 2023 तक, इम्प्लॉइज रिवार्ड और कॉस्ट मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म, 'प्रोपेल' (Propel) रेवेन्यू में सबसे बड़ा कॉन्ट्रीब्यूटर (65 फ़ीसदी) है, जिसके बाद प्रीपेड कार्ड जारी करने और इस्तेमाल से प्राप्त प्रोग्राम फी (30.6 फ़ीसदी) है. जानिए उससे जुड़ी अहम बातें...

जैगल प्रीपेड ओशन सर्विसेज: फ़ाइनेंशियल हिस्ट्री

प्रमुख आंकड़े 2 साल की ग्रोथ (% प्रति वर्ष) FY23 FY22 FY21
रेवेन्यू (करोड़ ₹) 51.9 553 371 240
EBIT (करोड़ ₹) 28 42 58 26
PAT (करोड़ ₹) 8.8 23 42 19
नेट वर्थ (करोड़ ₹) 49 -4 -46
कुल कर्ज (करोड़ ₹) 141 70 73
EBIT यानी अर्निंग्स बिफोर इंटरेस्ट और टैक्स
PAT यानी प्रॉफ़िट आफ्टर टैक्स

क्वालिटीः फ़ाइनेंशियल ईयर 2021 और 2022 कंपनी की नेटवर्थ निगेटिव थी. इसलिए, ROE कैलकुलेट नहीं हो सकती.

ग्रोथ : फ़ाइनेंशियल ईयर 2021 और 2023 के बीच रेवेन्यू और नेट प्रॉफ़िट क्रमशः 51.9 और 8.8 फ़ीसदी प्रति वर्ष बढ़ा.

वैल्युएशन: स्टॉक क्रमशः 87.4 और 4.5 गुने के P/E और P/B पर कारोबार करेगा.

ताकत
इकोनॉमी में डिजिटल पेमेंट अपनाने का चलन बढ़ने से इसका एक्टिव यूजर बेस 20 लाख से ज़्यादा हो गया है, जिसमें पिछले दो वर्षों के दौरान 58.5 फ़ीसदी की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

कंपनी ग्राहकों को जोड़े रखने में कामयाब रही है. दरअसल, पिछले फ़ाइनेंशियल ईयर में 70.5 फ़ीसदी रेवेन्यू मौजूदा ग्राहकों से अर्जित हुआ था. इसके अलावा, फ़ाइनेंशियल ईयर 2013 में केवल 1.5 फ़ीसदी ग्राहकों ने अपने कॉन्ट्रैक्ट टर्मिनेट किए.

कमजोरियां
प्रोग्राम फी, जो कुल रेवेन्यू का 30.6 फ़ीसदी है, पसंदीदा बैंकिंग पार्टनर्स के साथ समझौते पर निर्भर करता है. किसी कॉन्ट्रैक्ट के ख़त्म होने या एग्रीमेंट में संशोधन से रेवेन्यू पर बड़ा असर पड़ सकता है.

रेवेन्यू में दमदार बढ़ोतरी के बावजूद, ग्राहकों को लुभाने के लिए ज़्यादा ख़र्च (रिवार्ड प्वाइंट्स के रूप में) के कारण कंपनी की प्रॉफ़िटेबिलिटी कम बनी हुई है.

फ़ाइनेंशियल ईयर 2023 में डेट टू इक्विटी रेशियो लगभग तीन गुना रहा. इसके अलावा, कंपनी ने फ़ाइनेंशियल ईयर 2021 और फ़ाइनेंशियल ईयर 2022 में निगेटिव नेटवर्थ की सूचना दी.

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सामी होटल्स

SAMHI Hotels IPO : भारत में एक ब्रांडेड होटल ओनरशिप और एसेट मैनेजमेंट प्लेटफ़ॉर्म ने अपना IPO लॉन्च किया है. SAMHI होटल्स के पास भारत के 14 प्रमुख शहरों (मार्च 2023 तक) में 31 ऑपरेटिंग होटलों में 4,801 कमरों का पोर्टफ़ोलियो है. कंपनी कोर्टयार्ड बाय मैरियट, शेरेटन, हयात रीजेंसी, हयात प्लेस, फेयरफील्ड बाय मैरियट, फोर पॉइंट्स बाय शेरेटन और हॉलिडे इन एक्सप्रेस जैसे प्रसिद्ध होटल ऑपरेटरों के साथ काम करती है. फ़ाइनेंशियल ईयर 2023 तक, कमरों के लिहाज से वो भारत की तीसरी सबसे बड़ी होटल कंपनी है. जानिए इससे जुड़ी अहम बातें...

सामी होटल्स: फ़ाइनेंशियल हिस्ट्री

प्रमुख आंकड़े 2 साल की ग्रोथ (% प्रति वर्ष) FY23 FY22 FY21
रेवेन्यू (करोड़ ₹) 108.7 739 323 170
EBIT (करोड़ ₹) 66.8 141 -89 -181
PAT (करोड़ ₹) 15.8 -339 -443 -478
नेट वर्थ (करोड़ ₹) -808 -639 -195
कुल कर्ज (करोड़ ₹) 2744 2646 2444
EBIT यानी अर्निंग्स बिफोर इंटरेस्ट और टैक्स
PAT यानी प्रॉफ़िट आफ्टर टैक्स

क्वालिटी : SAMHI होटल्स को पिछले तीन साल से घाटा हो रहा है. इसके अलावा, इसी अवधि में इसकी नेट वर्थ निगेटिव थी.

ग्रोथ : फ़ाइनेंशियल ईयर 2023 और 2022 में इसकी टॉपलाइन में क्रमशः 129 फ़ीसदी और 90 फ़ीसदी की ग्रोथ हुई, जिसका मुख्य कारण RevPAR (प्रति उपलब्ध कमरा रेवेन्यू) और ऑक्युपैंसी रेट में बढ़ोतरी हुई.

वैल्युएशन : अपनी जैसी कंपनियों के 7.3 गुने के एवरेज की तुलना में स्टॉक की वैल्यू 7 गुने P/B पर है.

ताकत
थर्ड पार्टी ऑपरेटर्स मैरियट (11), IHG (10) और हयात (2) सहित, पूरे भारत में इसके 23 होटलों का प्रबंधन करते हैं.

कंपनी के मैरियट, हयात और IHG के साथ लंबे समय से संबंध हैं, जिनकी अवधि आम तौर पर 20 से 30 साल तक होती है.

कमजोरियां
कंपनी हाल के वर्षों में प्रॉफ़िट कमाने में नाकाम रही है और कंपनी की नेटवर्थ निगेटिव है.

SAMHI होटल्स पर ₹2,613 करोड़ का कुल कर्ज (कुल ऋण - कैश और कैश इक्विवैलेंट) है, जो काफ़ी ज़्यादा है. भले ही, इसका इरादा IPO से मिली ज़्यादातर रकम का उपयोग कर्ज चुकाने में करने का है, लेकिन इसकी बैलेंसशीट पर क़र्ज़ का काफी बोझ बना रहेगा.

अतीत में, कंपनी ने कुछ फ़ाइनेंशियल एग्रीमेंट्स के तहत कुछ डेट अनुबंधों का पालन नहीं किया था.

कंपनी की ग्रोथ स्ट्रैटजी होटलों (मुख्य रूप से व्यावसायिक होटलों) के अधिग्रहण और उन्हें सफलतापूर्वक चालू करने पर निर्भर है. एक महत्वपूर्ण अधिग्रहण जो ख़राब हो जाता है, वो बिज़नस को ख़तरे में डाल सकता है.

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EMS

EMS IPO : कंपनी न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण, आगरा विकास प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश जल निगम जैसी कई अन्य सरकारी संस्थाओं के लिए जल और वेस्ट वाटर कलेक्शन, ट्रीटमेंट और निपटान सेवाएं प्रदान करने के काम से जुड़ी है. इसके अतिरिक्त, कंपनी सड़कों और इमारतों के साथ-साथ बिजली और बिजली पारेषण जैसे बुनियादी ढांचे के निर्माण में भी सक्रिय रूप से लगी हुई है.

भारत में शहरी आबादी में बढ़ोतरी के साथ पानी के स्वच्छ स्रोतों की मांग बढ़ेगी, जिससे कंपनी को ग्रोथ में मदद मिल सकती है. सरकार की तरफ से शुरू की गई विभिन्न सामाजिक पहल से भी कंपनी को फ़ायदा हो सकता है. हालांकि, सरकारी नीतियों में बदलाव और रेवेन्यू जेनरेट करने के लिए उन पर अत्यधिक निर्भरता एक ख़तरा बनी हुई है. जानिए अहम बातें...

क्वालिटी : EMS का तीन साल का औसत इक्विटी पर रिटर्न (ROE) और लगाई गई पूंजी पर रिटर्न (ROCE) क्रमशः 22.3 और 30.5 फ़ीसदी है. फ़ाइनेंशियल ईयर 2023 में, कंपनी का ROE और ROCE क्रमशः 22.3 और 28.3 फ़ीसदी था.

ग्रोथ : सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की स्थापना से टॉपलाइन बढ़ने के कारण, फ़ाइनेंशियल ईयर 2023 और 2022 में इसकी इनकम में क्रमशः 49.6 फ़ीसदी और 8.8 फ़ीसदी की वृद्धि हुई.

वैल्युएशन : स्टॉक की कीमत क्रमशः 10.9 और 1.8 गुने के P/E और P/B पर होगी, जबकि इसकी जैसी दूसरी कंपनियों के लिए ये मीडियन और औसत क्रमशः 94.1 और 1.9 गुना है.

EMS: फ़ाइनेंशियल हिस्ट्री

प्रमुख आंकड़े 2 साल की ग्रोथ (% प्रति वर्ष) FY23 FY22 FY21
रेवेन्यू (करोड़ ₹) 27.6 538 360 331
EBIT (करोड़ ₹) 22.4 146 110 97
PAT (करोड़ ₹) 22.3 108 78 72
नेट वर्थ (करोड़ ₹) 488 380 302
कुल कर्ज (करोड़ ₹) 45 4 3
EBIT यानी अर्निंग्स बिफोर इंटरेस्ट और टैक्स
PAT यानी प्रॉफ़िट आफ्टर टैक्स

ताकत
कंपनी की लगभग सभी प्रोजेक्ट वर्ल्ड बैंक द्वारा वित्त पोषित हैं जिससे उसे कर्ज पर निर्भरता को कम करने में मदद मिलती है.

ये एक एसेट-लाइट बिजनेस मॉडल पर काम करती है जिससे उसकी कॉस्ट कम रहती है और प्रॉफ़िट मार्जिन सुधारने में मदद मिलती है.

कमजोरियां
सरकारी प्रोजेक्ट्स पर अत्यधिक निर्भरता :
कंपनी को सरकारी प्रोजेक्ट्स से 100 फ़ीसदी रेवेन्यू मिलता है. पर्यावरण और वाटर ट्रीटमेंट से संबंधित सरकारी नीतियों में किसी भी बदलाव से कंपनी की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.

ज़्यादा वर्किंग कैपिटल : ये कैपिटल की ज़्यादा डिमांड वाला बिज़नस है और ऐसे प्रोजेक्ट्स को पूरा होने में लंबा समय लगता है.
कंपनी पिछले पांच वर्षों में आवेदन किए गए टेंडर्स में से केवल 12 फ़ीसदी ही हासिल कर पाई है।

धीरेंद्र कुमार की सलाह

वैल्यू रिसर्च के सीईओ धीरेंद्र कुमार के मुताबिक़, बुनियादी तौर पर छोटे इन्वेस्टर्स के लिए IPO एक पहेली की तरह होते हैं, जिसका समाधान खोजना उनके लिए असंभव है. उन्होंने कहा, एक तरफ़ मौजूदा मालिकों और इन्वेस्टमेंट बैंकर्स के बीच हितों का टकराव होता है, वहीं निवेश करने वाली पब्लिक के पास भरोसे लायक़ जानकारी बेहद कम होती है. इस तरह की इन्वेस्टिंग को प्रोफेशनल्स पर ही छोड़ देना चाहिए जो इस बिज़नस में हों, और तगड़ा मोल-भाव करने के क़ाबिल हों. आम निवेशकों को IPO से दूर ही रहना चाहिए. हमेशा की तरह, बिना किसी अपवाद के उन्हें ऐसा करना चाहिए."

धीरेंद्र कुमार अपनी इस बात के लिए और कारण देते हुए कहते हैं, "इनमें बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव होता है. और अगर आपको इस उतार-चढ़ाव से परहेज़ नहीं है तो बेशक पैसा लगाइए, लेकिन बाद में मत कहिएगा कि आपको आगाह नहीं किया था."

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