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Stocks Investing: निवेश की इन 7 ग़लतियों से बचें

डोर्सी एसेट मैनेजमेंट के फ़ाउंडर पैट डोर्सी मानते हैं कि आपको ये सात ग़लतियां नहीं करनी चाहिए

Stocks Investing: निवेश की इन 7 ग़लतियों से बचें

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Stocks Market Investment: आपके रिटर्न की दिशा इससे तय होती है कि आप कितनी जल्दी-जल्दी ग़लतियां करते हैं. जितनी कम ग़लतियां करेंगे, आपका पोर्टफ़ोलियो उतना ही अच्छा होगा. मगर लाख टके का सवाल है कि आपको पता कैसे चलेगा कि आप अपने निवेश में ग़लती करने वाले हैं?

आप हमेशा पैट डोर्सी (Pat Dorsey) जैसे निवेश की दुनिया के बड़े नामों से मार्गदर्शन पा सकते हैं. उन्होंने डोर्सी एसेट मैनेजमेंट को खड़ा किया और ये इकोनॉमिक मोट की रेटिंग डवलप करने के लिए मशहूर है.

हमें, हाल ही में इनकी क़िताब, "द फाइव रूल्स फ़ॉर सक्सेसफ़ुल स्टॉक इन्वेस्टिंग" (The Five Rules For Successful Stock Investing) मिली. क़िताब में, डोर्सी ने बताया है कि कैसे निवेशक अक्सर निवेश संबंधी सात ग़लतियां करते हैं और नुक़सान उठाते हैं.

  • बेवज़ह जोख़िम उठाना: कई लोग 'हाई-रिस्क हाई-रिवॉर्ड' वाली मिसाल की ग़लत व्याख्या करते हैं और अपने निवेश के साथ बेवज़ह का जोख़िम उठाते हैं. आगे जाकर ऐसे जोख़िम भरे दांव आपके अच्छा परफ़ॉर्म कर रहे निवेशों पर मिलने वाले मुनाफ़े को कम कर देते हैं. डोर्सी ने अपनी क़िताब में लिखा है, "अपने पोर्टफ़ोलियो में जोख़िम भरे, 'सब कुछ या कुछ भी नहीं' वाले शेयरों को भर लेना, यानी, बेहतर रिटर्न पाने के लिए ज़रूरत से ज़्यादा रिस्क वाले शेयर ख़रीदना - आपके निवेश को मुसीबत में डाल सकता है."

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  • इस बार बात कुछ अलग है: पिछली ग़लतियों से सीख न लेना बहुत बड़ी ग़लती है, चाहे बात ज़िंदगी की हो या निवेश की. एक जैसे काम को दोहराने के बावजूद अलग नतीजों की उम्मीद करना पैसा गंवाने का बढ़िया तरीक़ा है. डोर्सी कहते हैं, वॉल स्ट्रीट पर चार सबसे महंगे वाक्य हैं, "इस बार कुछ अलग है." "इतिहास ख़ुद को दोहराता है", "बाज़ार का इतिहास न जानना एक बड़ी बाधा है," "आपको, मार्केट के आने वाले समय को समझने के लिए मार्केट का इतिहास जानना होगा". जब भी आप किसी को ये चार बातें कहते सुनें, "इस बार यह सच में अलग है... तो टीवी बंद कर दें और सैर पर निकल जाएं."
  • किसी प्रोडक्ट के प्रेम में पड़ना: एक कंज़्यूमर के तौर पर आप चाहेंगे कि आपका लोकल फास्ट-फूड आउटलेट उसी क़ीमत पर फ़्रेंच-फ्राइज़ (fries) डबल दे. लेकिन एक निवेशक के रूप में, क्या आप चाहेंगे कि आपकी कंपनियां घाटे में चलें? इसलिए, जब आप किसी कंपनी में निवेश करते हैं तो आपका ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि लंबे समय में बिज़नस कैसा परफ़ॉर्म करेगा. डोर्सी ने अपनी क़िताब में इसका सारांश दिया है और कहा है कि जब आप किसी स्टॉक को देखते हैं, तो अपने आप से पूछें, "क्या ये एक आकर्षक बिज़नस है? अगर मैं ख़रीद पता, तो क्या मैं पूरी कंपनी ख़रीदता?" अगर जवाब न है, तो ऐसा स्टॉक छोड़ दें - चाहे आपको कंपनी के प्रोडक्ट कितने ही पसंद क्यों न हों."
  • मार्केट गिरने पर घबरा जाना: इक्विटी निवेश का राज़ कम क़ीमत पर ख़रीदना और ज़्यादा क़ीमत पर बेचना है. मार्केट में गिरावट कम वैल्यू वाले स्टॉक को ख़रीदने का सही मौक़ा है. हालांकि, मार्केट में हर गिरावट के दौरान मौजूद विनाशकारी आशंकाओं के कारण निवेशक घबरा जाते हैं और स्टॉक्स ख़रीदने के बेहतर मौक़ों से चूक जाते हैं. डोर्सी कहते हैं, "स्टॉक आमतौर पर तब ज़्यादा आकर्षक होते हैं जब उन्हें कोई और नहीं ख़रीदना चाहता, न कि तब, जब कोई भी ऐरा-ग़ैरा अपनी उसे ख़रीदने की टिप दे रहा हो... एक निवेशक के तौर पर आप बेहतर परफ़ॉर्म करेंगे, अगर आप फ़ाइनेंशियल प्रेस में महीने की न्यूज़ पढ़ने के बजाय, अपने लिए सोचते हैं और मार्केट के कुछ ऐसे हिस्सों में मोलभाव करते हैं जिन्हें बाकी सब ने छोड़ दिया हो."

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  • बाज़ार के बारे में अंदाज़ा लगाने की कोशिश करना: इसे किसी परिचय की ज़रूरत नहीं है. हम सभी ने मार्केट के बारे में अनुमान लगाने से जुड़ी अफ़वाह के बारे में सुना है. डोर्सी ने चुटकी लेते हुए कहा, "बाज़ार का अंदाज़ा लगाना निवेश के अब तक के सबसे बड़े मिथक में से एक है. ऐसी कोई स्ट्रैटेजी नहीं है, जो आपको लगातार बताए कि कब बाज़ार में रहना है और कब इससे बाहर निकलना है, और जो भी ऐसा कहे, उसके पास आमतौर पर आपको बेचने के लिए एक मार्केट-टाइमिंग सर्विस होती है."
  • वैल्युएशन को नजरअंदाज़ करना: अस्थिर क़ीमत पर ख़रीदी गई एक अच्छी कंपनी निराशा का कारण बनती है. डोर्सी लिखते हैं, "आपको स्टॉक तभी ख़रीदना चाहिए जब आपको लगे कि बिज़नस जितने में बिक रहा है, इसकी क़ीमत उससे ज़्यादा है - इसलिए नहीं कि आपको लगता है कि कोई महामूर्ख कुछ महीनों के बाद शेयरों के लिए अच्छा पैसा देगा."
  • हर चीज़ के लिए अर्निंग्स पर निर्भर रहना: जैसे हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती, वैसे ही सभी अर्निंग्स कैश-फ़्लो में कन्वर्ट नहीं होती. निवेशक अक्सर अर्निंग ग्रोथ पर बहुत ज़्यादा ध्यान देने लगते हैं और कैश-फ़्लो पूरी तरह से नज़रअंदाज़ करते हैं. डोर्सी ने अपनी क़िताब में लिखा है, "आख़िर में, कैश-फ़्लो मायने रखता है, न कि अर्निंग. कई कारणों से, प्रति शेयर अकाउंटिंग-बेस्ड अर्निंग वैसा परफ़ॉर्म करती है जैसा कंपनी का मैनेजमेंट चाहता है, लेकिन कैश-फ़्लो के साथ खिलवाड़ करना बहुत मुश्किल होता है."

ग़लतियां जानना, निवेश की पहेली का एक हिस्सा है. खुद को तराशना ही असली इम्तिहान है, जो आपको इन ग़लतियों से बचा सकता है.

धनक साप्ताहिक

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