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Best SIP for Mutual Funds: 4 स्टेप में बेस्ट फ़ंड चुनें

आपकी SIP अच्‍छा परफ़ॉर्म नहीं कर रही है तो इसकी ये वजह हो सकती हैं

Best SIP for Mutual Funds: 4 स्टेप में बेस्ट फ़ंड चुनें

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How to Choose Mutual Funds for SIP: आजकल ज़्यादातर निवेशक SIP की अहमियत समझते हैं. वे जानते हैं कि इसके ज़रिए बड़ा पैसा बनाया जा सकता है. लेकिन बहुत से निवेशक ये भी जानना चाहते हैं कि उनकी SIP उम्‍मीद के मुताबिक़ प्रदर्शन क्‍यों नहीं कर रही है या उनकी रक़म तेज़ी से बढ़ क्यों नहीं रही है.

वैसे तो इसकी कई वजह हो सकती हैं. हो सकता है कि जब आपने SIP में निवेश शुरू किया हो तब से बाज़ार गिर रहा हो. या आपने SIP बढ़ते बाज़ार में शुरू की हो और अब बाज़ार में गिरावट का दौर हो. या हो सकता है कि आपको SIP शुरू किए हुए कुछ ही महीने हुए हों. इन सब वजहों में से एक बड़ी वजह ये भी हो सकती है कि आपने SIP के लिए ग़लत फ़ंड चुन लिया हो.

दिलचस्‍प बात ये है कि निवेशक इस बात‍ पर चौंक जाता है कि उसने ग़लत फ़ंड चुन लिया है. ऐसा इसलिए, क्‍योंकि निवेशक SIP को निवेश का तरीक़ा नहीं बल्कि निवेश का विकल्‍प समझता है. इसीलिए जब निवेशक से पूछा जाता है कि वो कहां निवेश कर रहे हैं तब अक्‍सर जवाब मिलता है - SIP में.

SIP सिर्फ़ निवेश का एक तरीक़ा है. इसके ज़रिए आप सिस्‍टमैटिक तरीक़े से इक्विटी फ़ंड में निवेश करते हैं. ऐसा करते हुए आप अपने पूरे पैसे को बाज़ार के सबसे ऊंचे स्‍तर पर निवेश करने की गुंजाइश कम कर लेते हैं, और आपके निवेश की लागत औसत हो जाती है. जब बाज़ार गिरता है, तो आपकी SIP को इक्विटी फ़ंड की ज़्यादा यूनिट मिलती हैं. और जब बाज़ार चढ़ता है, तो आपकी SIP को कम यूनिट मिलती हैं. कुल मिलाकर SIP अनुशासित तरीके से निवेश करने, और पैसे को थोड़ा-थोड़ा निवेश करके बड़ा फ़ंड तैयार करने में मदद करती है. लेकिन, अगर आपने ऐसे फ़ंड में निवेश किया है जो पिछले काफ़ी समय से अपनी कैटेगरी के दूसरे फ़ंड की तुलना में ख़राब प्रदर्शन कर रहा है, तो इस बात की आशंका ज़्यादा होती है कि आप औसत से कम रिटर्न हासिल करेंगे. भले ही आप SIP के ज़रिए निवेश कर रहे हों.

ऐसे में SIP के लिए सही फ़ंड का चुनाव करना बेहद अहम हो जाता है. तो SIP के लिए सही फ़ंड आप कैसे चुनेंगे? हम आपको इसके लिए कुछ गाइडलाइन दे रहे हैं.

ये भी पढ़िए- म्यूचुअल फ़ंड में निवेश कैसे करें? निवेश शुरू करने वालों के लिए इन्वेस्टमेंट गाइड

ये गाइडलाइन फ़ॉलो करें

सही कैटेगरी चुनें
बाज़ार में कई तरह के इक्विटी फ़ंड हैं. ये इक्विटी फ़ंड छोटी बड़ी और मझोली कंपनियों में आपका पैसा निवेश करते हैं. सबसे पहले इन फ़ंड्स में से अपनी ज़रूरत के हिसाब से सबसे काम का फ़ंड चुनें. कुछ इक्विटी फ़ंड आपके पैसे का बड़ा हिस्‍सा लार्ज-कैप यानी बड़ी कंपनियों में निवेश करते हैं. कुछ इक्विटी फ़ंड, मिड-कैप यानी मझोली कंपनियों में, तो कुछ दूसरे फ़ंड आपकी रक़म सिर्फ़ किसी एक सेक्‍टर या थीम में निवेश करते हैं. मल्‍टी-कैप फ़ंड छोटी-बड़ी सभी तरह की कंपनियों में निवेश कर सकते हैं. ऐसे में, ये बाज़ार के अवसरों को बेहतर तरीके से भुना सकते हैं. जो लोग ज़्यादा रिटर्न पानें के लिए थोड़ा ज़्यादा जोख़िम ले सकते हैं, उन्हें मिड और स्‍माल-कैप फ़ंड्स को चुनने के बारे में सोचना चाहिए. और अगर आप टैक्‍स बचाना चाहते हैं, तो आप टैक्‍स सेविंग फ़ंड में निवेश कर सकते हैं.

लंबे समय के रिटर्न
इक्विटी फ़ंड का आकलन करते समय अक्‍सर निवेशक एक बड़ी ग़लती करते हैं. वो फ़ंड का सिर्फ़ पिछले चार-छह महीने का ही रिटर्न देखते हैं. कोई फ़ड कम अवधि में ज़्यादा जोख़िम लेने या बाज़ार में तेज़ी का दौर होने की वजह से अच्‍छा प्रदर्शन कर सकता है. लेकिन बाद में ऐसे फ़ंड अपना प्रदर्शन बरक़रार नहीं रख पाते हैं. ऐसे में आपको फ़ंड चुनते समय, पिछले 5 या 10 साल का रिटर्न देखना चाहिए. इसके अलावा ये देखना भी ज़रूरी है कि 2008 जैसी बड़ी गिरावट के दौर में फ़ंड कितना गिरा. बाज़ार में बड़ी गिरावट के दौर में ख़ुद को बड़ी गिरावट से बचाने की क्षमता रखने वाले फ़ंड निवेश के लिए बेहतर होते हैं.

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फ़ंड का मैनेजमेंट
आपको फ़ंड के, फ़ंड मैनेजर पर ग़ौर करना चाहिए. अगर फ़ंड मैनेजर काफ़ी साल से फ़ंड मैनेज कर रहा है, तो ये अच्‍छी बात है. एक अनुभवी फ़ंड मैनेजर बाज़ार के उतार-चढ़ाव के कई दौर देख चुका होता है और वो जानता है कि मुश्किल समय के फ़ंड कैसे संभाला जाए. इसके अलावा मैनेजमेंट का स्‍टाइल एक सा बना रहना भी अहम होता है और एक निवेशक को इस पर ग़ौर करना चाहिए.

निवेश का ख़र्च
लंबे समय के दौरान, फ़ंड के एक्‍सपेंस यानी ख़र्च आपके कुल रिटर्न में बड़ा अंतर पैदा कर सकते हैं. ऐसे में, फ़ंड का ख़र्च चेक करें. लेकिन इसे फ़ंड चुनने का सबसे अहम फ़ैक्टर न बना लें. अगर आप ख़ुद से फ़ंड चुन सकते हैं और उसके प्रदर्शन पर नज़र रख सकते हैं, तो आपको डायरेक्‍ट प्‍लान लेना चाहिए. इसमें डिस्‍ट्रीब्‍यूटर कमीशन नहीं होता. वहीं, अगर आपको फ़ंड के प्रदर्शन पर नज़र रखने के लिए फ़ाइनेंशियल एडवाइज़र या डिस्‍ट्रीब्‍यूटर की मदद चाहिए, तो आपके लिए रेग्‍युलर प्‍लान में निवेश करना बेहतर है. आखिरी बात इक्विटी फ़ंड में निवेश करना है, तो SIP के जरिए निवेश करना सबसे अच्‍छा तरीक़ा है. एक अच्‍छे फ़ंड में की गई SIP लंबी अवधि में आकर्षक रिटर्न दिलाने में मदद करती है.

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