फ़र्स्ट पेज audio-icon

निवेशकों का सुहाना सफ़र

वैल्‍यू रिसर्च स्‍टॉक एडवाइज़र ने बहुत से निवेशकों को अपनी 5 साल की सर्विस में इन्‍वेस्टिंग को समझने और अपने दम पर सफ़ल होने का शानदार मौक़ा दिया है

निवेशकों का सुहाना सफ़र

back back back
8:25

इक्विटी इन्‍वेस्टिंग एक मुश्किल काम है और इसके लिए किसी को गाइड करना और भी मुश्किल है. पर मैं इस विषय पर ज़्यादा बात करने से बचता हूं क्योंकि निजी तौर पर मेरे लिए ये काम काफ़ी संतुष्टि देने वाला है. यहां मेरा मतलब पैसे से नहीं, बल्कि उस सुखद अहसास से है जिसमें आप निवेश की इस कला के बारे में बहुत सारे लोगों के सीखने से सुख पाते हैं. इस बात से ख़ुश होते हैं कि बहुत से लोग अच्छा पैसा कमाएंगे और अपनी समझ बढ़ाएंगे.

इक्विटी इन्‍वेस्टिंग के दायरे में आने वाली बहुत कम ही चीजें हैं जो तयशुदा होती हैं. किसी एक दिन क्या होगा इसे लेकर आप यक़ीन से कुछ नहीं कह सकते. यही बताता है कि इक्विटी इन्‍वेस्‍टर होना कितना मुश्किल है. तमाम दिन ऐसे होते हैं जब हालात बहुत ज़्यादा चुनौती भरे हो जाते हैं, फिर भी इक्विटी इन्‍वेस्टिंग का सफ़र काफ़ी मज़ेदार है. मैं बहुत से इक्विटी इन्‍वेस्‍टर्स को तनाव में देखता हूं. और ज़्यादातर तनाव कंपनियां चुनने और ग़लत कंपनी चुनने के डर से जुड़ा होता है. जब मार्केट उछाल पर होता है तो इस बात पर तनाव होता है कि अब मार्केट ज़ल्‍दी ही गिर जाएगा. जब आपका स्‍टॉक दूसरों से कुछ अलग चाल चल रहा होता है तब भी तनाव हो जाता है.

कुछ लोग एक अलग क़िस्म के तनाव का शिकार होते हैं. वो तब भी चिंता करते हैं जब उनका स्‍टॉक अच्‍छा कर रहा होता है लेकिन उन्हें दूसरों के स्‍टॉक के उनसे बेहतर नतीजे देख-देख कर तनाव हो रहा होता है. और कुछ निवेशक, जो रोज़ के इस तनाव के बावजूद, कुछ साल तक अपना फ़ोकस बनाए रखते हैं उन्हें नज़र आने लगता है कि कैसे उनके पैसे शानदार तरीक़े से बढ़े हैं.

चिंता से भरे दिन और हफ़्ते ख़ुशियों से भरे साल लाते हैं.

जानकारी और भरोसा
ऐसा भी नहीं कि तनाव लेना ज़रूरी है. जानकारी और भरोसा इस समस्या का समाधान कर सकते हैं. इससे मुझे एक टेक्नीक याद आ गई. यूरोप में कुछ एयरलाइंस यात्रियों के तनाव को कम करने के लिए इस टेक्नीक का इस्‍तेमाल कर रही हैं. बहुत से लोगों को फ़्लाइट में डर लगता है और फ्लाइट के टेक ऑफ़ के समय तो वो काफ़ी घबरा जाते हैं. इसके लिए एयरक्राफ़्ट मैन्‍यूफ़ैक्‍चरर एयरबस ने पता लगाया कि अगर ऐसे पैसेंजर, पायलट और एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल के बीच बातचीत सुन सकें, तो उनको डर नहीं लगेगा. सवाल है कि ऐसा क्‍यों है? ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें पता रहेगा कि क्या हो रहा है. वो सुन सकेंगे कि पायलट और ATC, शांत माहौल में आम दिनों की तरह अपना काम कर रहे हैं. और यात्री जिस हादसे की कल्पना कर रहे हैं, वो सही नहीं है. जानकारी और समझ आपको तनाव से बचा सकते हैं.

मेरा मानना है कि इक्विटी इन्‍वेस्टिंग के साथ भी ऐसा ही है. अगर हम इन्‍वेस्टिंग को अंदाज़ लगा कर और अफ़वाहों के आधार पर करेंगे, तो तनाव होना तय है. वहीं, अगर हमें अपने इन्‍वेस्‍टमेंट पर भरोसा है, और हम इस बात को जानते-समझते हैं कि क्यों कोई स्‍टॉक चुना गया है और हमें पता हो कि हमारे हर स्‍टॉक का बिज़नस कैसे बढ़ रहा है, तो तनाव क्‍यों होगा? इस तरह से इक्विटी इन्वेस्टिंग, पायलट और ATC की बातचीत सुनने जैसा है.

ये भी पढ़िए- फ़ंड बनाम इन्वेस्टर का ताज़ा एपिसोड

फ़ंड, स्‍टॉक और कुछ इससे ज़्यादा भी
हालांकि, बहुत से निवेशक मुश्किलों का सामना करते हैं क्‍योंकि वे किसी भी तरह जानकारी हासिल करने की कोशिश ही नहीं करते, इसलिए वो इक्विटी इन्‍वेस्टिंग के लिए ज़रूरी आत्‍मविश्‍वास कभी हासिल नहीं कर पाते. सबसे आसान काम है - जो वैल्‍यू रिसर्च दशकों से कर रहा है - इक्विटी म्‍यूचुअल फ़ंड में निवेश. इस तरीक़े से आप रिसर्च और जानकारी वाला हिस्सा किसी और के हवाले कर देते हैं और कुछ आसान काम अपने हाथ में लेते हैं, जैसे म्यूचुअल फ़ंड का चुनाव और उसे ट्रैक करना. बहुत सारे म्‍यूचुअल फ़ंड हैं लेकिन धनक की मदद से कुछ अच्छे फ़ंड चुनना और इसके बाद अपने इन्‍वेस्‍टमेंट को ट्रैक करना इतना मुश्किल नहीं है.

हालांकि, बहुत से लोगों के लिए, इसके बाद का क़दम उठाना अच्छा रहेगा. वो क़दम है, खुद स्‍टडी करने का, अपनी समझ से स्‍टॉक चुनने का.

ख़ुद अपना एडवाइज़र बनें
हमारे पाठकों का एक वर्ग कुछ अलग तरह की डील चाहता है. एक ऐसा प्रॉडक्‍ट जिसमें उन्हें ज़्यादा डायरेक्‍ट और फ़ोकस्‍ड स्‍टॉक रेकमेंडेशंस मिले. जिसे हम एक्टिव तरीक़े से मेनटेन करें और इसे लेकर गहरी रिसर्च करें. इसके अलावा वो कुछ डिजिटल टूल भी चाहते हैं, जो उनको किसी भी कंपनी के बारे में रिसर्च करने में सक्षम बनाए और निवेशक के तौर पर ख़ुद को ज़रूरी जानकारी से लैस कर सकें. बरसों तक सोचने-विचारने और चीजें डवलप करने के बाद, 2017 में हमने प्रीमियम सर्विस लॉन्‍च की. इस सर्विस में ये सभी बातें शामिल थीं. इसके साथ ही हमने एक रिसर्च टीम तैयार की और रिसर्च का तरीक़ा तय किया. ये सब का आधार हमारा वैल्थ इनसाइट और म्यूचुअल फ़ंड इनसाइट का अनुभव रहा.

नवंबर 2017 में सर्विस लॉन्‍च होने के बाद के साल काफ़ी दिलचस्प रहे. एक तरफ़ हमने अपने बढ़ते मेंबर्स के लिए कई नए फीचर्स जोड़े. वहीं दूसरी तरफ़, मार्केट उतार-चढ़ाव से भरा रहा, जैसा कि मार्केट के साथ हमेशा होता ही है. कोविड-19 से निपटने के लिए जो हालात पैदा हुए उन्होंने कुछ समय के लिए मुश्किल खड़ी की. 2017 में जब हमने अपनी प्रीमियम वैल्‍यू रिसर्च स्‍टॉक एडवाइज़र सर्विस लॉन्‍च की, तो हमारी रिसर्च टीम के पास कंपनियों की एक बड़ी लिस्‍ट थी. ये कंपनियां मैंनेजमेंट क्‍वालिटी और फाइनेंशियल्‍स के आधार पर निवेश के लिए शानदार कंपनियां थीं. हालांकि इनमें से कुछ बहुत ज़्यादा महंगी थीं. इसलिए, वैल्‍यू इन्‍वेस्टिंग के सिद्धांतों के आधार पर कुछ शानदार कंपनियों को रेकमेंड करने के लिए हमारे कस्टमर्स को इंतज़ार करना पड़ा. हालांकि इसके बाद से मार्केट के उतार-चढ़ाव के साथ हमारी बहुत सी A लिस्‍ट वाली कंपनियां शानदार क़ीमत में उपलब्ध हो गईं. हम वैल्‍यू रिसर्च स्‍टॉक एडवाइज़र में लगातार नई रेकमेंडेशन ज़ारी कर रहे हैं और हमारी रेकमेंडेशन लिस्‍ट में 50 से ज़्यादा कंपनियां हैं और हमारे सब्‍सक्राइबर्स का पोर्टफ़ोलियो कम वैलुएशन पर बना है. ये भविष्‍य के रिटर्न के लिहाज़ से अच्‍छा है. ऊंचे रिटर्न की संभावनाएं, रिसर्च में पारदर्शिता और गहरी जानकारी. स्‍टॉक एडवायजर ये कोर सर्विस मुहैया कराता है. लेकिन और भी चीज़ें हैं, जिसका फ़ायदा हमारे सब्‍सक्राइबर्स उठा रहे हैं.

ये भी पढ़िए- पीटर लिंच की तरह कैसे करें निवेश?

ये महज़ एक लिस्‍ट ही नहीं है
हमारी टीम ने एक स्‍टॉक स्‍क्रीनर सिस्‍टम तैयार किया है. ये आपके लिए बहुत काम का है. ये एक अनोखा टूल है और अब तक इस तरह का कोई टूल भारतीय इक्विटी इन्‍वेस्‍टर के लिए उपलब्‍ध नहीं था. ये आपको किसी भी फ़ाइनेंशियल क्राइटेरिया के आधार पर स्‍टॉक की जांच-परख करने में मदद करता है. लेकिन बात यहीं नहीं रुक जाती.

हमारे पास इससे भी दिलचस्प चीज़ें हैं जैसे अलग-अलग क्राइटेरिया पर आधारित पहले से तय स्‍क्रीन्स. इसमें से हमारी कुछ स्‍क्रीन, जैसे 'आकर्षक ब्‍लूचिप' 'उचित मूल्‍य' और 'डिस्काउंट टू बुक वैल्‍यू" से हमारे मैगज़ीन के पाठक परिचित होंगे.

इसके साथ ही हमारे पास 'वैल्यू गुरु' स्क्रीन भी हैं, जो निवेश के गुरुओं के स्टाइल पर आधारित हैं. इसमें दिए स्‍टॉक पांच गुरुओं के निवेश के तरीक़ों के आधार पर ऑटोमैटिक तरीक़े से आपके लिए स्टॉक्स फ़िल्‍टर करते हैं. इन गुरुओं के नाम हैं बेन ग्रॉहम, जोएल ग्रीनब्‍लाट, जॉन नेफ़, पीटर लिंच और वॉल्‍टर श्‍लॉस. हमने ये सभी चीज़ें अपनी मैगज़ीन वेल्‍थ इनसाइट में कवर करना शुरू कर दिया है.

वैल्‍यू रिसर्च स्‍टॉक एडवाइज़र लगातार ख़ुद को बेहतर बना रहा है. हालांकि, हमारे दूसरे सभी प्रॉडक्‍ट और सर्विस की तरह, हमने इसके लिए ऊंचे पैमाने तय किए हैं और इसीलिए हम सभी अपने इन्वेस्टमेंट के लिए ख़ुद भी इसका इस्‍तेमाल करते हैं.

देखिए ये वीडियो- म्यूचुअल फ़ंड की दुनिया का आठवां अजूबा


दूसरी कैटेगरी