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निवेश शुरू करने का सही समय!

म्यूचुअल फ़ंड कोर्स की सीरीज़ पार्ट-2 में बात निवेश शुरू करने के सही समय की

निवेश शुरू करने का सही समय!Anand Kumar

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पहले पार्ट में हमने बात की निवेश की अहमियत को लेकर, जिसे आप समझ गए होंगे. अब आप सोच रहे होंगे कि निवेश शुरू करने का सबसे अच्‍छा समय कौन सा होगा? तो इस पर हम कहेंगे कि निवेश शुरू करने का पहला सबसे अच्‍छा समय तब था जब पहली सैलरी मिली या जब आपने कमाना शुरू किया, और उसके बाद, सबसे अच्‍छा समय है आज!

निवेश में देर करने का नतीजा
जितना जल्‍दी निवेश शुरू करेंगे, कंपाउंडिंग की ताक़त का उतना ही ज़्यादा फ़ायदा आप अपने निवेश से उठा सकेंगे. निवेश में देर करने का सीधा-सीधा मतलब होता है - उस एक्स्ट्रा मुनाफ़े से हाथ धोना, जो जल्दी निवेश करके आप पा सकते थे.

ये कंपाउंडिंग कैसे होती है?
मुनाफ़ा या रिटर्न तब कंपाउंड होता है जब निवेश पर मिलने वाला रिटर्न, निवेश की रक़म में जुड़ जाता है और आप अपने रिटर्न भी रिटर्न कमाते हैं. मान लीजिए कि आप ₹100 को 5 फ़ीसदी ब्‍याज पर बैंक में जमा करते हैं. ये ब्‍याज हर साल मिलता है. पहले साल के अंत में, आपका ब्‍याज ₹5 होगा. दूसरे साल में मिलने वाले ब्‍याज में, पहले निवेश किए पैसे, और पिछले साल मिला ब्‍याज, दोनों जुड़ जाएंगे. यानी, अब आपको ₹105 पर ब्‍याज मिलेगा. और तीसरे साल में, दूसरे साल का ब्‍याज भी जुड़ जाएगा. इस तरह, साल-दर-साल आपका ब्‍याज भी, ब्‍याज कमाने लगेगा.

कंपाउंडिंग का चमत्कारी फ़ायदा समझना ज़रूरी
गणित में दिलचस्पी रखने वाले लोग ही कंपाउंडिंग के नतीजों को सही तरीक़े से समझ सकते हैं. हम जैसे आम लोगों को इसे समझने के लिए कैलकुलेशन का सहारा लेना पड़ता है. तो, आइए एक उदाहरण से कंपाउंडिंग का कैलकुलेशन समझते हैं.

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नितिन और पूजा दोस्‍त हैं. दोनों ने 25 साल की उम्र में काम करना शुरू किया. शुरूआत में ही पूजा ने हर महीने ₹10,000 निवेश करने शुरू कर दिए, और 25 साल तक निवेश जारी रखा. इस 25 साल में, पूजा ने कुल ₹30 लाख निवेश किए. अगर हम उनके निवेश का सालाना रिटर्न 12 फ़ीसदी मानें, तो 50 साल की उम्र तक पूजा ने ₹1.8 करोड़ जुटा लिए. वहीं शुरुआती दौर में नितिन ने ख़ूब ख़र्च किया, और 10 साल बाद, यानी 35 साल की उम्र में निवेश शुरू किया. अगले 15 साल तक उन्होंने हर महीने ₹17,000 निवेश किए. सालाना 12 फ़ीसदी रिटर्न पाने के बावजूद 50 साल की उम्र तक उनका निवेश ₹85 लाख तक ही पहुंच पाया.

कंपाउंडिंग का जादू
पूजा और नितिन ने क़रीब-क़रीब बराबर पैसा निवेश किया और दोनों को एक जैसा रिटर्न मिला, पर उनमें से एक ने, दूसरे के मुक़ाबले दोगुने से ज़्यादा पैसा बनाने में क़ामयाबी पाई. कुछ ऐसा होता है कंपाउंडिंग का जादू.

गणित आसान हो, तो हम उसे सरलता से समझ पाते हैं मगर कंपाउंड ग्रोथ को समझना हर किसी के लिए इतना सहज नहीं हैं. सच तो ये है कि सालाना 10 फ़ीसदी की दर से बढ़ने वाला निवेश पहले 10 साल में दोगुने से ज़्यादा हो जाएगा, इसके बाद के 10 साल में क़रीब 6 गुना और फिर उसके बाद के 10 साल में क़रीब-क़रीब 16 गुना हो जाएगा. ज़्यादातर लोगों के लिए ये बात समझना आसान नहीं होता.

पार्ट-3 में कंपाउंडिंग का फ़ायदा उठाने की बात
अब सवाल है कि आप कंपाउंडिंग का ज़्यादा-से-ज़्यादा फ़ायदा कैसे उठा सकते हैं? और आपको कहां निवेश करना चाहिए? म्यूचुअल फ़ंड कोर्स की सीरीज़ पार्ट-3 में हम और आप इसी विषय पर बात करेंगे.

इस सीरीज के दूसरे भाग-
1. आपको अमीर बना सकता है निवेश!
2. धन पाने और अमीर बनने का रास्ता
3. म्‍यूचुअल फ़ंड से दोस्‍ती
4. पहले म्‍यूचुअल फंड का प्‍लान
5. प्‍लान पर अमल करें
6. अगला कदम: निवेश को ट्रैक करें
7. निवेश से पहले कर लें ये काम

धनक साप्ताहिक

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