इंश्योरेंस

कैसे खरीदें लाइफ इन्‍श्‍योरेंस

लाइफ इन्‍श्‍योरेंस खरीदने से पहले इन पांच बातों पर विचार जरूर करें

कैसे खरीदें लाइफ इन्‍श्‍योरेंस

हमारे देश में जब लोग लाइफ इन्‍श्‍योरेंस खरीदने का मन बनाते हैं तो सबसे पहले उनके दिमाग में आता है कि लाइफ इन्‍श्‍योरेंस कवर कितना होना चाहिए। थोड़ी माथापच्‍ची करने के बाद ज्‍यादातर लोग जितनी राशि का लाइफ इन्‍श्‍योरेंस कवर लेते हैं, वह उनकी जरूरतों को पूरा करने के लायक नहीं होता। एक और तरीका बहुत आम है। लोग पॉलिसी और सम अश्‍योर्ड तय करने के लिए बीमा एजेंट की सलाह लेते हैं। बीमा एजेंट जो पॉलिसी या सम अश्‍योर्ड बता देता है। वे उसी के हिसाब से पॉलिसी खरीद लेते हैं।

आपको कितनी राशि का लाइफ इन्‍श्‍योरेंस कवर लेना चाहिए। यह फैसला करने का एक ही सही तरीका है कि आप नीचे दी जा रही पांच बातों पर विचार करें। इसके बाद आपको सही और आपकी जरूरतों को पूरा करने के लायक रकम का लाइफ इन्‍श्‍योरेंस कवर खरीदने में आसानी होगी।

रिटायरमेंट में बचा है कितना समय

आपको टर्म इन्‍श्‍योरेंस प्‍लान खरीदने से पहले इस बात पर विचार करना चाहिए कि आपके रिटायरमेंट में कितना समय है। और आपकी जरूरतों को पूरा करने के लिए कितना सम अश्‍योर्ड पर्याप्‍त होगा। यहां आपके रिटायरमेंट का मतलब सिर्फ नौकरी से रिटायर होने से नहीं है।

यहां रिटायरमेंट की अवधि से मतलब इस बात से भी है कि कितने समय तक आपके परिवार के सदस्‍य आर्थिक रूप से आप पर निर्भर रहेंगे। एक बार जब आप यह पता लगा लेते हैं कि कितने साल तक आपको अपने परिवार का खर्च उठाना है तो आपके लिए उतने ही साल की अवधि वाली पॉलिसी चुनना आसान जाता है। उदाहरण के लिए अगर आपको 20 साल बाद रिटायर होना है तो आपकी पॉलिसी की अवधि कम से कम 20 साल होनी चाहिए।


देनदारी

देनदारी से बचने के लिए जहां तक संभव हो आप कर्ज के लिए इन्‍श्‍योरेंस पॉलिसी लेकर रखें जिससे आपके न रहने पर इन्‍श्‍योरेंस कंपनी कर्ज का भुगतान कर दे। अगर आपने होम लोन ले रखा है तो संभव है कि लोन देने वाले बैंक या कंपनी ने पहले ही आपको इन्‍श्‍योरेंस दिलाया हो। इसके अलावा अगर आपने और किसी तरह का लोन लिया है तो आप इस अमाउंट को ध्‍यान में रखते हुए अपने टर्म प्‍लान के कवर की रकम तय करें। इससे किसी तरह की अनहोनी में आपके परिवार को टर्म प्‍लान से जो रकम मिलेगी, उससे वे लोन चुकाने की स्थिति में होंगे।

भविष्‍य के खर्चे

इस रकम का अनुमान लगाने में काफी मुश्किल होती है कि किसी तरह की अनहोनी होने पर भविष्‍य में आपके परिवार को खर्च चलाने के लिए कितने रकम की जरूरत होगी। और बढ़ती महंगाई के प्रभाव को खत्‍म करने के लिए सही रकम क्‍या होगी। आप एक अनुमानित रकम तय करके 7 फीसदी सालाना महंगाई दर के हिसाब से इसकी कैलकुलेशन कर सकते हैं।

एजुकेशन

इन्‍श्‍योरेंस कंपनियां ऐसी पॉलिसी लाने का प्रयास कर रही हैं जो आपके बच्‍चों की एजुकेशन का खर्च उठा सकें। आपको इस तरह के टर्म प्‍लान की जरूरत है कि अगर आप के रहते हुए बच्‍चों की एजुकेशन पूरी हो जाती है तो आपको कोई रकम नहीं मिलेगी। दूसरे शब्‍दों में कहें तो आपको पारंपरिक लाइफ इन्‍श्‍योरेंस प्‍लान से बचना है और टर्म प्‍लान पर बने रहना है।

जरूरी खर्च

आपको इस बात का आकलन करना होगा कि आपके परिवार को जरूरी खर्चो के लिए कितनी रकम की जरूरत होगी और इस रकम को जुटाने के लिए कितना निवेश करना होगा। आपका टर्म इन्‍श्‍योरेंस इतनी रकम का होना चाहिए। आप एक फाइनेंशियल प्‍लान बनाएं। अगर आपकी वाइफ वर्किंग नहीं हैं तो शायद उनको काम शुरू करने की जरूरत पड़े। अगर उनको एक छोटा बिजनेस शुरू करना है तो आपको इस बात को ध्‍यान में रखना है कि इसके लिए कितनी रकम की निवेश के तौर पर जरूरत होगी।


अब बाती है कि कितनी रकम का कवर काफी होगा। इसे सम अश्‍योर्ड कहते हैं। तो इसके लिए कोई एक तय नियम नहीं हो सकता है। सबकी जरूरतें अलग होती हैं। ऐसे में सबके लिए लाइफ इन्‍श्‍योरेंस कवर की रकम भी अलग होगी। जिसे लाइफ कवर लेना है वही तय कर सकता है कि कितनी रकम का कवर काफी होगा। कवर की रकम मौजूदा लाइफ स्‍टाइल, सालाना फैमिली इनकम, सालाना खर्च, मौजूदा निवेश और देनदारियां जैसे होम लोन या एजुकेशन लोन के आधार पर तय की जानी चाहिए। इन आंकड़ों पर गौर करने जो अंतिम वैल्‍यू आएगी वह उस व्‍यक्ति की लाइफ वैल्‍यू होगी, जो कवर खरीदने की प्‍लानिंग कर रहा है। ज्‍यादातर कंपनियां कैलकुलेशन सरल बनाने के लिए अपनी वेबसाइट पर ‘ह्यूमन लाइफ’वैल्‍यू कैलकुलेटर मुहैया कराती हैं। हां कैलकुलेशन करते हुए महंगाई पर गौर करना न भूलें। आज 100 रुपए की जो खरीद क्षमता है वह समय के साथ गिरती जाएगी।

यह तय करना बेहद अहम है कि आपको कितने सम एश्‍योर्ड का कवर चाहिए। ज्‍यादा सम अश्‍योर्ड के लिए ज्‍यादा प्रीमियम देना होगा जबकि आपको वास्‍तव में उतने सम एश्‍योर्ड की जरूरत नहीं है। जबकि कम सम अश्‍योर्ड किसी तरह की अनहोनी की सूरत में आपके परिवार की वित्‍तीय जरूरतों को पूरा नहीं कर पाएगा। ज्‍यादातर इंन्‍श्‍योरेंस प्रोडक्‍ट मिनिमम और मैक्सिमम सम अश्‍योर्ड के साथ आते हैं। ऐसे में आपके लिए यह चेक करना जरूरी है कि जो सम अश्‍योर्ड दिया जा रहा है क्‍या वह आपकी जरूरतों से मैच करता है।

इसके अलावा, आपको अलग-अलग इन्‍श्‍योंरंस कंपनियों के प्रीमियम और क्‍लेम सेटेलमेंट रे‍शियो की तुलना भी करनी चाहिए। कुछ पॉलिसी ऊंचे सम अश्‍योर्ड पर डिस्‍काउंट देती हैं या महिलाओं से कम प्रीमियम चार्ज करती हैं। हालांकि कभी कभी डिस्‍काउंट मार्केटिंग से जुड़ी चालबाजी भी होती है। और पॉलिसी का प्रीमियम ऊंचा रख कर फिर डिस्‍काउंट दिया जाता है।

इस तरह से से आप किसी तरह की अनहोनी के लिए कारगर फाइनें‍शियल प्‍लान तैयार कर सकते हैं। इससे बचने का प्रयास न करें। हकीकत तो यह है कि हम भारतीय अपनी मौत को लेकर किसी तरह की प्‍लानिंग करने के खिलाफ रहे हैं। बहुत कम लोग अपनी वसीयत बनाते हैं। देश के सबसे सफल और अमीर उद्यमी भी अपनी वसीयत बनाए मर गए और अपने दो बेटों को विरासत हासिल करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।


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