इंटरव्यू

कोटक के फ़ंड मैनेजर अतुल भोले क्यों किसी बिज़नस के लिए प्रीमियम देने को तैयार रहते हैं?

इस इंटरव्यू में, भोले ने अपनी निवेश फ़िलॉसफ़ी पर विस्तार से चर्चा कर रहे हैं

अतुल भोले के पास फ़ाइनेंशियल मार्केट्स का क़रीब दो दशकों का तजुर्बा है.कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फ़ंड में एक फ़ंड मैनेजर, उन्होंने सिर्फ़ चार महीने पहले कोटक इमर्जिंग इक्विटी और कोटक इक्विटी हाइब्रिड फ़ंड की कमान संभाली थी. ₹48,100 करोड़ की कुल संपत्ति के साथ, इन फ़ंड्स को वैल्यू रिसर्च ने 4 स्टार रेटिंग दी है.

इस इंटरव्यू में, भोले ने अपने पोर्टफ़ोलियो में लागू किए जा रहे रणनीतिक बदलावों पर चर्चा की और हाई P/E रेशियो वाले शेयरों के लिए अपनी प्राथमिकता के बारे में बताया. वो मौजूदा बाज़ार के हालात पर भी बात कर रहे हैं, ये देखते हुए कि कई शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन तो किया है, लेकिन उनके बुनियादी सिद्धांतों में ज़रूरी सुधार नहीं हुए हैं.

यहां उनसे बातचीत के संपादित अंश पढ़िए:

आपको फ़ाइनेंशियल मार्केट की दुनिया में किस चीज़ ने आकर्षित किया?
दरअसल, 'आकर्षित' सही शब्द नहीं है क्योंकि मैं एक-एक कर छांटे जाने वाले तरीक़े से इक्विटी बाज़ारों में आया. 10वीं पूरी करने के बाद, मैंने कॉमर्स स्ट्रीम चुनी क्योंकि मैं साइंस में नहीं जाना चाहता था. बाद में, चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) कोर्स करते समय, मुझे एहसास हुआ कि मैं जीवन भर ऑडिट और टैक्स नहीं कर सकता. इसलिए, मैं बी-स्कूल में पहुंच गया, और वहां भी, फ़ाइनांस करते वक़्त, मुझे समझ में आया कि मैं भविष्य में बैंकिंग या फ़ाइनांस ऑफ़िसर जैसी भूमिका नहीं निभा सकता. बिज़नस स्कूल में रहते हुए, मेरे एक प्रोफ़ेसर इक्विटी बाज़ारों में निवेशक थे, और इस तरह मैंने इक्विटी बाज़ारों में दिलचस्पी लेना शुरू कर दिया और फ़ाइनांस की दुनिया में आ गया.

क्या आप अपनी निवेश फ़िलॉसोफ़ी के बारे में बता सकते हैं? किस तरह के स्टॉक या बाज़ार की स्थितियां आपका ध्यान खींचती हैं?
मेरी निवेश शैली और फ़िलॉसोफ़ी हाई क्वॉलिटी मैनेजमेंट में निवेश करने की ओर ज़्यादा झुकती है. बहुत से लोग हाई बिज़नस क्वॉलिटी पर ध्यान केंद्रित करते हैं, लेकिन मैं मैनेजमेंट पर ध्यान केंद्रित करता हूं. भारतीय संदर्भ में और डेढ़ दशक से ज़्यादा समय तक बाज़ारों से सीखने के बाद, मुझे लगता है कि मैनेजमेंट या प्रमोटर बहुत महत्वपूर्ण हैं. प्रमोटरों के पास किसी बिज़नस को बनाने या ख़त्म करने की ताक़त होती है, इसलिए अच्छे प्रमोटरों के साथ रहना ज़रूरी है.

हम बिज़नस मॉडल और ग्रोथ की संभावनाओं को भी देखते हैं, लेकिन शुरुआती प्वाइंट मैनेजमेंट है. चूंकि ये मेरी शैली है, इसलिए मुझे उन बिज़नसों के लिए प्रीमियम वैल्युएशन का भुगतान करना होगा. वक़्त के साथ, मेरा मानना है कि ये नज़रिया (हाई वैल्युएशन) आपको इन कंपनियों के ग्रोथ में हिस्सा लेने की इजाज़त देता है और दुर्घटनाओं या गिरावट के रिस्क को भी कम करता है. अच्छे मैनेजमेंट और क्वालिटी वाली कंपनियों के साथ शुरुआत करने से नुक़सान की संभावना कम हो जाती है. बढ़त पर कब्ज़ा करना और गिरावट की रक्षा करना इक्विटी बाज़ारों में अल्फ़ा पैदा कर सकता है.

अच्छे मैनेजमेंट की तलाश करते समय आप किन फ़ैक्टर्स पर विचार करते हैं?
ये सब्जैक्टिव (सापेक्ष) है. हमारे पास म्यूचुअल फ़ंड इंडस्ट्री में काम करने का बड़ा तजुर्बा है और हमने बिज़नस मैनेज करते समय प्रमोटरों के समूह और मैनेजमेंट का व्यवहार देखा है. मिसाल के लिए, मैनेजेमेंट का फ़ैसला करते वक़्त, सबसे पहले विचार करने वाली बात बिज़नस का कैपिटल एलोकेशन है ये ग्रोथ रेट और रिटर्न रेशियो को बनाए रखने और गिरावट को सीमित करने के लिए महत्वपूर्ण है.

इसके बाद, मैं ये भी देखता हूं कि मैनेजमेंट ने लालच और डर के साइकल के दौरान कैसा काम किया है. हमने बार-बार देखा है कि ख़ुशहाल बाज़ार या आर्थिक अवधि के दौरान, मैनेजमेंट अक्सर अधिग्रहण के लिए ख़राब कैपिटल एलोकेशन करने जैसी ग़लतियां करते हैं. तो, वे मुसीबत में पड़ जाते हैं.

दरअसल, हमें ऐसे मैनेजमेंट की भी ज़रूरत है जो बिज़नस में निवेश न करे, जब बाज़ार या अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही हो. ऐसे फ़ेज़ में, कई मैनेजर हाईबरनेशन में चले जाते हैं और निवेश नहीं करते. हालांकि, रिकवरी के दौरान, उनका कम निवेश उन्हें रेवेन्यू जनरेट करने से रोकता है. इंटेग्रिटी (सत्यनिष्ठा) जैसी ख़ूबियों के साथ-साथ प्रभावी मैनेजमेंट के लिए ये बुनियादी मानदंड हैं.

किसी स्टॉक को आकर्षक ख़रीदारी के तौर पर पहचान करते समय आप किन बड़े फ़ैक्टर्स को ध्यान में रखते हैं?
किसी ख़ास स्टॉक के चुनाव में, मैनेजमेंट, बिज़नस और ग्रोथ स्टॉक अनालेसिस के महत्वपूर्ण भाग हैं. कैश पैदा करना, रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) और दूसरे फ़ाइनेंशियल पैमानों जैसे अहम फ़ैक्टर्स के अलावा, मुझे लगता है कि मार्केट शेयर के मामले में बिज़नस की स्थिति बहुत अहम होती है. मार्केट शेयर को बनाए रखना या बढ़ाना ज़रूरी है, क्योंकि ये लंबे वक़्त तक वैल्यू बनाता है और बाज़ार ऐसी कंपनियों को पुरस्कृत करता है.

इसके अलावा, ग्रोथ की क्षमता और मौक़े का साइज़ भी ज़रूरी बातें हैं. अगर 3-4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में बिज़नस सिर्फ़ ₹5,000-10,000 करोड़ का है, तो ऐसे बिज़नस पर विचार करने का कोई मतलब नहीं.

आख़िर में, मैं वैल्युएशन फ़ैक्टर पर चर्चा करूंगा, जो किसी स्टॉक का चुनते वक़्त सबसे आख़िर में आता है. अगर कोई स्टॉक मैनेजमेंट और बिज़नस ग्रोथ की संभावनाओं के मामले में अच्छा है, तो मैं उन कंपनियों को थोड़ा ज़्यादा वैल्युएशन देने को तैयार हूं. बिज़नस की क्वॉलिटी और कमाई का कंपाउंडिंग मेरे द्वारा भुगतान किए जा रहे हाई वैल्यूएशन की भरपाई कर देगा.

किस तरह के बाज़ार या परिस्थितियां आपकी निवेश शैली से मेल खाती हैं?
मुझे या तो सामान्य बाज़ार पसंद है या ऐसी स्थिति जब कुछ उतार-चढ़ाव होता है. तेज़ी वाले बाज़ारों में, मोमेंटम का पीछा करते समय ग़लतियां होती हैं, और बुनियादी सिद्धांत अच्छे नहीं होते हैं. मेरा मानना है कि मौजूदा बाज़ार ऐसी स्थिति में है जहां कई शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन उनके बुनियादी सिद्धांतों में सुधार नहीं हुआ है. अगर हम अनुशासन और धैर्य बनाए रखें तो भी इस तरह के बाज़ार में कुछ ग़लतियां होंगी. इसलिए, इस तरह का बाज़ार ऐसा नहीं है जिसमें मुझे मज़ा आता हो क्योंकि ये चिंता के साथ ही ख़त्म होता है, और इसमें एख गिरावट बड़ी हो सकती है.

बिना किसी बड़े उतार-चढ़ाव वाले बाज़ार मेरे लिए आदर्श हैं, क्योंकि वे अच्छी क्वालिटी वाले मैनेजमेंट को ख़रीदने के मेरे ढांचे के मुताबिक़ हैं. बहुत से लोग मंदी वाले बाज़ारों को पसंद करते हैं, लेकिन मैं कहूंगा कि ऐसे बाज़ारों में, बिज़नस की संभावना स्थापित करना या बिज़नस कैसे वापस आएगा, ये तय करना बहुत मुश्किल होता है. कई मामलों में, हम सिर्फ़ वैल्युएशन देख कर निवेश कर सकते हैं, लेकिन ये एक वैल्यू ट्रैप भी हो सकता है.

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सिर्फ़ चार महीने पहले कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फ़ंड में शामिल होने के बाद, क्या आप कोटक इमर्जिंग इक्विटी और कोटक इक्विटी हाइब्रिड फंड पोर्टफ़ोलियो के लिए किसी बदलाव या एडजस्टमेंट की सोच रहे हैं?
अगर आप मेरे पहले वालों द्वारा मैनेज पोर्टफ़ोलियो को देखें, तो मुझे लगता है कि शैली और रूपरेखा, काफ़ी हद तक, एक जैसी हैं. क़रीब 80-90 फ़ीसदी पोर्टफ़ोलियो शैली समान है. मूल रूप से, मैं जो कर सकता हूं वो कुछ घरेलू सेक्टर के शेयरों में मुनाफ़ावसूली है, जिन्होंने पिछले दो सालों में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है और जिनका वैल्युएशन थोड़ा ज़्यादा है. ये ऐसे बिज़नस नहीं हैं जहां हम कमाई या टॉप-लाइन ग्रोथ को जारी रख सकते हैं. कुछ हद तक, ये बिज़नस साइक्लिकल हैं.

इसलिए, जबकि मैं पोर्टफ़ोलियो के कुछ हिस्से में मुनाफ़ावसूली कर रहा हूं, मैं उस पैसे को उन सेक्टरों में भी लगा रहा हूं जो हक़ीक़त में पिछले दो से तीन साल में बहुत वक़्त और प्राइस में सुधार से गुजरे हैं. मैं फ़ार्मास्युटिकल, आईटी और अस्पताल शेयरों से नाम जोड़ रहा हूं क्योंकि मेरा मानना ​​है कि वे अगले पांच-10 सालों में संरचनात्मक विषय होंगे. इसके अलावा, मैं 10-15 फ़ीसद पोर्टफ़ोलियो में कुछ टैक्टिकल आइडिया भी शामिल करने के बारे में सोच रहा हूं. ये अर्थव्यवस्था या क़ारोबारी माहौल में बदलाव से जुड़े स्टॉक हो सकते हैं. मिसाल के तौर पर, हम बिजली, रेलवे और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में अच्छी ग्रोथ देख रहे हैं. पोर्टफ़ोलियो में कुछ आइडियाज़ की कमी थी. 2010-20 के दौरान, इन सैक्टरों ने काम नहीं किया था, लेकिन 2022 में उन्होंने वापसी की. इसलिए, मैं ऐसे आइडिया के बारे में भी सोच रहा हूं, जो पोर्टफ़ोलियो का 10-15 प्रतिशत हिस्सा बन सकते हैं, क्योंकि वे हाई डिविडेंड यील्ड के साथ अच्छे वैल्युएशन पर उपलब्ध हैं.

सोलर,कमिंस इंडिया,सुप्रीम और थर्मैक्स जैसे हाई P/E रेशियो वाले शेयरों के मामले में, ग्रोथ स्टॉक के लिए इतने हाई मल्टीपल का भुगतान करने पर आपकी क्या राय है?
मैं दोहराऊंगा कि मुझे अच्छी क्वालिटी वाला मैनेजमेंट और बिज़नस पसंद हैं; उनका P/E हमेशा हाई रहता है. जैसा कि पहले चर्चा की गई है, वैल्युएशन मेरे लिए शुरुआती प्वाइंट नहीं है. इसलिए, जब हम स्टॉक ख़रीदते हैं, तो कुछ का P/E ज़्यादा हो सकता है. मेरा तजुर्बा ये है कि जिन शेयरों का P/E 40 या 50 है, उनमें निवेश करने के लिए 10 या 15 के P/E वाले स्टॉक को ख़रीदने के मुक़ाबले ज़्यादा गहरी रिसर्च और स्टडी चैनल चेक की ज़रूरत होती है. 10-15 के P/E के साथ ये शेयरों के आकर्षक वैल्युएशन की वजह से है. फिर भी, जब मैं हाई मल्टीपल शेयरों में निवेश करता हूं, तो मुझे बिज़नस की क्वॉलिटी और गंभीर ग़लतियों से बचने की मैनेजमेंट की क्षमता का प्रदर्शन करना होगा. हाई P/E स्टॉक ख़रीदते समय, व्यक्ति को पक्का यक़ीन होना चाहिए. अगर हम इतिहास पर नज़र डालें तो उन्होंने निवेशकों को रिटर्न दिया है. निजी बैंकों में ऐसे नाम हैं जिन्होंने हमेशा हाई वैल्युएशन पर क़ारोबार किया है. फिर भी, कोई बड़ी ग़लती न करके, वे 15-20 फ़ीसदी की अर्निंग ग्रोथ देना जारी रखते हैं और इन शेयरों ने लंबे समय के दौरान मज़बूत रिटर्न दिया है.

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