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NPS vs PPF vs EPF: बेस्ट रिटायरमेंट इन्वेस्टमेंट

NPS की 15वीं सालगिरह पर आपके रिटायरमेंट की बचत के तीन विकल्पों में सबसे अच्छा क्या है?

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भले ही ये शुरुआती दौर में है, लेकिन तब भी ये बाक़ियों से थोड़ा अलग है. दूसरों के उलट, इसने ₹50,000 की अतिरिक्त टैक्स में कटौती (डिडक्शन) ऑफ़र की. दूसरों से अलग, इसने पक्का किया कि आपकी रिटायरमेंट प्लानिंग में एक इक्विटी का हिस्सा हो, जो बहुत ज़रूरी है. इसका पता आपको बाद में चलेगा. और दूसरों के विपरीत, इसमें आपके लिए ज़्यादा बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस बनाने की क्षमता है. पर, इस बारे में भी ज़्यादा बात बाद में करेंगे.

जिस बेस्ट रिटायरमेंट ऑप्शन की हम बात कर रहे हैं वो है NPS. साल 2009 में ही ज़्यादातर भारतीय निवेशकों की नज़रें नेशनल पेंशन स्कीम (National Pension Scheme) पर टिकी थीं. हालांकि, 2004 में NPS सरकारी कर्मचारियों के लिए खुला, मगर इसके पांच साल बाद NPS ने आम लोगों के लिए अपने दरवाजे़ खोल दिए.

उस समय तक पब्लिक प्रॉविडेंट फ़ंड (PPF) और इम्प्लॉयी प्रोविडेंट फ़ंड (EPF) ने रिटायरमेंट प्लानिंग पर राज किया. कुछ दूसरे विकल्प भी थे, लेकिन वे इस क्षेत्र में दोयम दर्जे के ही थे.

2024 तक तेज़ी से आगे बढ़ते हुए NPS अपना 15वीं सालगिरह मना रहा है. इस दौरान, इसने PPF और EPF का एकाधिकार तोड़ दिया है. पिछले एक दशक में इस विकल्प ने 35 लाख सब्सक्राइबरों का बेस बना लिया है. और इसके कारण भी ग़ौर करने लायक़ हैं. ये आंशिक रूप से इक्विटी में निवेश करता है; NPS टियर-1 अपने ग्राहकों को 25 प्रतिशत, 50 प्रतिशत और 75 प्रतिशत इक्विटी एलोकेशन के विकल्प की इजाज़त देता है. नतीजा, ये प्रदर्शन के मामले में दोनों दिग्गजों से आगे निकल जाता है. कम-से-कम पिछले 15 साल में, 25 प्रतिशत के सबसे कंज़रवेटिव एलोकेशन के साथ सबसे ख़राब प्रदर्शन करने वाले NPS फ़ंड ने भी PPF और EPF को क्रमशः 16.3 और 11.9 प्रतिशत से पीछे छोड़ा होगा. 'रिटायरमेंट की मैराथन का विजेता' टाइटल वाला ग्राफ़ देखें.

ये भी पढ़िए - NPS और EPF में क्या अंतर है, रिटायरमेंट प्लानिंग में किससे मिलती है ज़्यादा मदद?

NPS के बेहतर प्रदर्शन के कारण
इसका इक्विटी एक्सपोज़र. दूसरे दोनों विकल्प मुख्य रूप से डेट-बेस्ड निवेश के तरीक़े (debt based instrument) हैं, जो ख़ास अवधि में ब्याज के तयशुदा रेट की घोषणा करते हैं. NPS की रणनीतिक में इक्विटी एलोकेशन की लंबी अवधि के दौरान रिटायरमेंट कॉर्पस की बढ़ोतरी इसे टर्बोचार्ज इंजन बना देती है. शुरुआती लोगों के लिए, इक्विटी से जुड़ा रिस्क लंबे समय में कम हो जाता है, यही कारण है कि सभी उम्र और रिस्क प्रोफ़ाइल वाले रिटायरमेंट प्लान करने वाले लोगों को अपने रिटायरमेंट के निवेश में इक्विटी का हिस्सा ज़रूर रखना चाहिए.

लंबे अर्से के दौरान अपने प्रभावशाली रिटर्न के अलावा, NPS दो ख़ास फ़ायदे देता है जो एक आकर्षक रिटायरमेंट निवेश विकल्प के तौर पर इसकी स्थिति को और मज़बूत करता है:

1- एडिशनल टैक्स बेनेफिट: जैसा कि पहले बताया गया है, इन्वेस्टर सेक्शन 80CCD (1B) के तहत ₹50,000 तक के एक्स्ट्रा टैक्स डिडक्शन का दावा कर सकते हैं. ये PPF और EPF पर पहले से उपलब्ध ₹1.5 लाख की टैक्स कटौती के अतिरिक्त है.

2- ऑटोमेटिक रिबैलेंसिंग: NPS 15th एनिवर्सरी पर टैक्स फ़्री ऑटोमेटिक पोर्टफ़ोलियो रिबैलेंसिंग की एक अनूठी सुविधा देता है. ये सुनिश्चित करता है कि आपका एसेट एलोकेशन आपकी पूर्वनिर्धारित सीमा के भीतर बना रहे. इसके अलावा, इंडिपेंडेंट इक्विटी (equity) और डेट (debt) इन्वेस्टमेंट ख़रीदने और बेचने पर कुछ टैक्स लगते हैं, लेकिन इसमें नहीं.

क्या NPS में कोई नकारात्मक पहलू हैं? इसका नेगेटिव है, इसकी विड्रोल पॉलिसी जो रिटायरमेंट के दौरान रेगुलर इनकम का एनुअल प्लान ख़रीदने पर 40 प्रतिशत धनराशि का इस्तेमाल अनिवार्य कर देती है. बाक़ी 60 फ़ीसदी रक़म रिटायरमेंट पर एकमुश्त या चरणबद्ध तरीके़ से निकाली जा सकती है.

सभी का कहना है कि, पैसे निकालने सख़्त पॉलिसी कई निवेशकों के लिए एक वरदान है, ख़ासकर उनके लिए जिनका हाथ अपने पैसे को लेकर बहुत खुला हुआ है और अनुशासन की कमी है. अंततः, इससे ग्राहकों को उनके रिटायरमेंट के सालों के लिए अच्छी ख़ासी पूंजी जमा करने में मदद मिलेगी.

हमारी राय
बात जब रिटायरमेंट प्लानिंग की हो, तो केवल एक ही विजेता दिखाई देता है: N - P - S.

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