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तीन क्वालिटी मिडकैप स्टॉक जो इस समय सस्ते हैं

ये तीन मिड-कैप कंपनियां हैं जिनकी ग्रोथ भी अच्छी रही है और वैल्यूएशन भी सही है

तीन क्वालिटी मिडकैप स्टॉक जो इस समय सस्ते हैं

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दलाल स्ट्रीट में तेज़ी लगातार ज़ारी है. ब्लू-चिप सेंसेक्स इंडेक्स ने पिछले साल 22 फ़ीसदी की छलांग लगाई, जबकि इसके मिड कैप साथी ने 65 फ़ीसदी की शानदार छलांग लगाई!

इस तेज़ी के बाद स्टॉक साफ़ तौर पर बहुत ज़्यादा महंगे दिख रहे हैं, जिससे निवेश के आकर्षक मौक़े तलाशना मुश्किल हो गया है. ऐसे में ये याद रखना चाहिए कि मज़बूत बुनियाद वालीकंपनियां तभी अच्छे रिटर्न देती हैं, जब उन्हें किफ़ायती क़ीमतों पर ख़रीदा जाता है.

इसलिए, हमने अपने 'टॉप वैल्यू मिड-कैप (top value mid-caps) स्टॉक स्क्रीन का इस्तेमाल करके इसी तरह की कंपनियां ढूंढ़ने की कोशिश की. हमारा ये टूल, उन मिड कैप कंपनियों (₹11,000-63,000 करोड़ का मार्केट कैप) को फ़िल्टर करता है जिनका क्वालिटी स्कोर 5 से ज़्यादा और वैल्यूएशन स्कोर 6 से ज़्यादा है.

इसके बाद, हमने उन तीन ग़ैर-BFSI कंपनियों को चुना जिनका सालाना रेवेन्यू पिछले पांच साल में 20 फ़ीसदी से ज़्यादा बढ़ा. आइए, इन तीनों कंपनियों की ग्रोथ संभावनाओं पर नज़र डालें:

चंबल फ़र्टिलाइज़र्स एंड केमिकल्स

भारत का क़रीब 12 फ़ीसदी यूरिया प्रोडक्शन चंबल फर्टिलाइज़र्स द्वारा किया जाता है (FY23). कंपनी अपने रेवेन्यू का लगभग 60 फ़ीसदी हिस्सा यूरिया फर्टिलाइज़र्स से हासिल करती है. ये कंपनी ग़ैर-यूरिया फर्टिलाइज़र्स (DAP, MOP, NPK), पौधों का ख़ास पोषक तत्व और फसल की सुरक्षा करने वाले केमिकल भी मार्केट करती है.

चंबल फ़र्टिलाइज़र्स ने यूरिया में डिमांड-सप्लाई के अंतर को भुनाने में तेज़ी दिखाई है. यूरिया भारत में काफ़ी ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला फ़र्टिलाइज़र है. कंपनी ने राजस्थान के गडेपान में अपना तीसरा प्लांट बनाने के लिए ₹5,700 करोड़ का निवेश किया, जिससे इसकी यूरिया प्रोडक्शन क्षमता साल (FY) 2018 में 2.1 मीट्रिक टन से बढ़कर FY2023 में 3.4 मीट्रिक टन हो गई.

FY2018-23 के बीच कंपनी के रेवेन्यू और नेट प्रॉफ़िट में क्रमशः 30 और 16 फ़ीसदी की मज़बूत बढ़ोतरी हुई है. पौधों के लिए ख़ास पोषक तत्वों और फसल सुरक्षा केमिकल्स जैसे ग़ैर-यूरिया सेग्मेंट में कंपनी के निवेश ने ग्रोथ हासिल करने में मदद की है.

हालांकि, फर्टिलाइज़र इंडस्ट्री पर सरकार का बहुत ज़्यादा रेगुलेटरी कंट्रोल है; और सरकार द्वारा ही क़ीमत तय किए जाने की वजह से कंपनियों की मोलभाव करने की ताक़त बिल्कुल ख़त्म हो जाती है. इसलिए, उनका रेवेन्यू काफ़ी हद तक सरकारी सब्सिडी पर निर्भर करता है, जिसे सरकार इस आधार पर देती है कि कंपनियां कितनी एनर्जी एफिशिएंट हैं.

इसलिए, चंबल फर्टिलाइज़र्स अपनी एनर्जी एफिशिएंसी में सुधार कर रही है. कंपनी का गड़ेपान III प्लांट अमोनिया प्योरिफ़ायर, CO2 हटाने वाले सिस्टम और यूरिया सिंथेसिस सिस्टम से लैस है. इससे कंपनी को ज़्यादा सरकारी सब्सिडी लेने और अपनी प्रॉफ़िटेबिलिटी और मार्जिन बढ़ाने में मदद मिलती है.

भारत में यूरिया उत्पादन की कमी और कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए सरकारी कोशिशों से चंबल के लिए कई बड़े अवसर बने हुए हैं. इसके अलावा, कंपनी ने लगभग ₹1,170 करोड़ ख़र्च करके एक टेक्निकल अमोनियम नाइट्रेट प्लांट बनाने की योजना बनाई है, जिसका इस्तेमाल कोयला खनन, सीमेंट प्रोडक्शन, 'आयरन ओर' और इंफ़्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स जैसे दूसरे तरक़्क़ी करते सेग्मेंट्स में किया जा सकता है.

हालांकि, सब्सिडी पर इसकी बहुत ज़्यादा निर्भरता (जिसमें देरी या कटौती का काफ़ी जोख़िम होता है) बिज़नस को अस्थिर और वर्किंग कैपिटल इंटेंसिव बनाती है. ध्यान दें कि सब्सिडी मिलने में देरी के कारण, मौजूदा एसेट्स के प्रतिशत के रूप में इसकी ट्रेड रिसीवेबल्स की रक़म FY2020 में 76 फ़ीसदी तक पहुंच गई थी. इंडस्ट्री का साइक्लिक स्वभाव और मौसम संबंधी अनिश्चितता भी चिंता के विषय हैं.

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इंद्रप्रस्थ गैस और महानगर गैस

गैस डिस्ट्रीब्यूटर इंद्रप्रस्थ गैस (IGL) और महानगर गैस (MGL) को, डीजल की खपत कम करने और अलग-अलग इंडस्ट्री में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के इस्तेमाल को अनिवार्य करने की सरकारी नीतियों का लंबे समय से फ़ायदा हुआ है.

इसने दोनों कंपनियों को अपने-अपने मार्केट में मज़बूत पकड़ बनाने में मदद की. IGL मुख्य रूप से दिल्ली-NSR क्षेत्र में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) बेचती है, जबकि MGL मुंबई, अर्बन ठाणे, इसके आसपास के क्षेत्रों और रायगढ़ में एकमात्र CNG और PNG डिस्ट्रीब्यूटर है.

CNG अपनी कम क़ीमत के कारण एक अच्छा ऑटो ईंधन है और PNG को खाना पकाने वाली गैस के रूप में सहूलियत के लिए पसंद किया जाता है, जिससे इन दोनों की ज़्यादा डिमांड बनी रहती है.

दोनों कंपनियां अपने इंफ़्रास्ट्रक्चर नेटवर्क (CNG स्टेशन और PNG के लिए पाइप कनेक्शन) को लगातार बढ़ाकर इस डिमांड को पूरी कर पाईं. नतीजा, FY2018-23 के बीच IGL और MGL के कुल रेवेन्यू (टॉप लाइन) में क्रमशः 26 और 23 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई.

इसके अलावा, इंफ़्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए विशेष समझौते और इंडस्ट्री का हाई-रेगुलेटरी और हाई-कैपिटल एक्सपेंडिचर का स्वभाव दोनों दिग्गजों को फ़ायदा पहुंचाता है, क्योंकि दूसरी कंपनियों के लिए इस क्षेत्र में उतरना मुश्किल हो जाता है.

हालांकि, दिल्ली सरकार की हालिया इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी (जो कैब एग्रीगेटर को अपने फ़्लीट में 5 फ़ीसदी EVs जोड़ने और 2030 तक पूरी तरह से EVs में बदलने का आदेश देती है) विशेष रूप से IGL के लिए एक बड़ा जोख़िम पैदा करती है.

कंपनी का 60-65 फ़ीसदी CNG वॉल्यूम दिल्ली से आता है, और दिल्ली सरकार के इस क़दम से IGL के लगभग 20 फ़ीसदी वॉल्यूम पर असर पड़ सकता है. EV पर सरकार के बढ़ते फ़ोकस का असर महानगर गैस पर भी पड़ रहा है.

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क्या EV से वाकई ख़तरा है?

हालांकि EV से बिल्कुल ख़तरा है, फ़िर भी हमारा मानना है कि ये दोनों दिग्गजों पर गहरा असर नहीं डालेगा.

EV का असर सबसे पहले पेट्रोल और डीजल की डिमांड पर पड़ेगा, क्योंकि कम क़ीमत और ज़्यादा माइलेज़ के कारण CNG अभी भी सबसे पसंदीदा विकल्प बना हुआ है. इसके अलावा, EV इंफ़्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह से बनने में अभी कई साल लगेंगे.

दोनों कंपनियों ने अपने जमे-जमाए और व्यापक रूप से मौजूद CNG स्टेशनों में बैटरी स्वैपिंग और चार्जिंग सेगमेंट में अपने ऑपरेशन शुरू कर दिए हैं.

हर घर को पाइप नेटवर्क के ज़रिए से जोड़ने के सरकार के लक्ष्य के कारण, PNG के दूसरे बिज़नस सेग्मेंट्स में ग्रोथ की काफ़ी ज़्यादा गुंजाइश बनी हुई है. अलग-अलग इंडस्ट्री में PNG के अलावा किसी दूसरी गैस के इस्तेमाल पर पहले से ही पाबंदी है.

लंबी दूरी के वाहनों के लिए लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) सेगमेंट पर IGL और MGL का बढ़ता फ़ोकस भी ग्रोथ में योगदान देगा, क्योंकि इन वाहनों के भारी वजन के कारण बैटरी नाकाफ़ी होंगी और ईंधन के रूप में हाइड्रोजन का इस्तेमाल करने में अभी कई और साल लगेंगे.

इसलिए, IGL एक छोटा प्लांट (देश में इस तरह का पहला प्रोजेक्ट) तैयार कर रहा है जिसका इस्तेमाल CNG को LNG में बदलने के लिए किया जाएगा.

इसलिए, हमारा मानना है कि दोनों कंपनियों के कई प्लान हैं और इन्हें देखते हुए उनके लिए ग्रोथ की संभावनाएं अभी भी बरक़रार हैं.

चेतावनी: ये स्टॉक सुझाव नहीं है. कृपया निवेश करने से पहले ज़रूरी जांच करें.

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