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पैसिव इन्वेस्टिंग का पैराडॉक्स: ज़्यादा ख़रीदने के लिए, कम बेचो

बिना ज़्यादा सोचे नियमों पर आधारित निवेश के अजीब नतीजे

पैसिव इन्वेस्टिंग का पैराडॉक्स: ज़्यादा ख़रीदने के लिए, कम बेचोAnand Kumar

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हेलिओस के CEO और फ़ंड मैनेजर समीर अरोड़ा ने हाल में एक पहेलीनुमा ट्वीट किया, "ये फ़िल्म स्पीड के संवाद पर आधारित है: 'बस में एक बम है. एक बार जब बस 50 मील प्रति घंटे की रफ़्तार के पार हो जाती है, तो बम एक्टिव हो जाता है. अगर 50 से नीचे आ जाए, तो ये फट जाता है. अब आप क्या करेंगे? बाज़ार FII से कहता है: "अगर आप HDFC बैंक के ज़्यादा शेयर बेचते हैं, तो FII का स्वामित्व गिर जाता है, MSCI इंडेक्स में बैंक का वेट दोगुना कर देता है, जिससे कई FII/ETF/इंडेक्स फ़ंड और बेंचमार्क फ़ॉलो करने वाले फ़ंड ख़रीदने के लिए मजबूर हो जाते हैं. अगर आप नहीं बेचते, तो MSCI कुछ नहीं करता, और कोई अतिरिक्त ख़रीदारी नहीं होती...'

क्या आप समझे कि यहां क्या हो रहा है? MSCI एक अमेरिकी कंपनी है जो कई स्टॉक मार्केट इंडेक्स चलाती है, जिसे कई ग्लोबल इन्वेस्टर फ़ॉलो करते हैं. MSCI समय-समय पर फ़्री फ़्लोट जैसे फ़ैक्टर के आधार पर अपने इंडेक्स में शेयरों का वेट (weightage) एडजस्ट करता है. इसी की मिसाल देते हुए, समीर अरोड़ा ने HDFC बैंक के शेयरों का डायनामिक समझाने के लिए एक फ़िल्म के डायलॉग का क्रिएटिव तरीक़े से इस्तेमाल किया है. अगर FII ने HDFC बैंक के थोड़े शेयर बेचे, तो ये विरोधाभासी रूप से ज़्यादा ख़रीदारी शुरू कर सकता है. ऐसा कैसे होता है? बेचने से फ़्री फ़्लोट कम हो जाएगा. जिसके बाद MSCI इंडेक्स में स्टॉक का वेट बढ़ाने के लिए कहेगी. ये इंडेक्स फ़ंड्स और ETF को, जो इंडेक्स फ़ॉलो करते हैं, बढ़े हुए वेट के मुताबिक़ ज़्यादा शेयर ख़रीदने के लिए मजबूर करेगा. इससे इंडेक्स पर बेंचमार्क किए गए एक्टिव फ़ंड भी अपनी पोज़िशन बढ़ाने के लिए दबाव महसूस कर सकते हैं.

दूसरी ओर, अगर FII नहीं बेचते, तो MSCI HDFC बैंक के मौजूदा वेट को क़ायम रख सकता है, जिसका नतीजा होगा कि इंडेक्स-ट्रैकिंग फ़ंड्स की ओर से ख़रीदारी का कोई दबाव नहीं होगा. इस मामले में, ये पिछले हफ़्ते हुआ. अगर FII ने सामूहिक रूप से स्टॉक का केवल 0.05% प्रतिशत बेचा होता, तो इससे स्टॉक का वेट दोगुना हो जाता. अगर ऐसा होता, तो बहुत सारे ETF और दूसरे निवेशक जो इंडेक्स फ़ॉलो करने के लिए बाध्य होते, और उन्हें अपनी हिस्सेदारी दोगुनी करनी होती.

निवेश मीडिया में इसे बड़े पैमाने पर रिपोर्ट किया गया और सोशल मीडिया में भी इस पर कमेंट आए. ज़्यादातर लोगों ने इसे बाज़ार में जीवन के एक दिलचस्प तथ्य के तौर पर देखा, ठीक वैसे ही जैसे निवेश काम करता है. हालांकि, मुट्ठी भर लोगों ने इसे वो कहा जो ये है, यानी एक मूर्खता. यहां एक इंडेक्स है जिसे निवेशक बड़े पैमाने पर फ़ॉलो करते हैं और इंडेक्स के नियमों में से एक नियम कहता है कि अगर थोड़े से निवेशक थोड़ा सा बेच देते हैं तो बहुत सारे लोगों को बहुत सा ख़रीदना होगा—काफ़ी ज़्यादा. अगर उन्होंने ऐसा किया, तो क़ीमत ऊपर जाएगी.

इस तरह से निवेश करने का क्या मतलब है? ये इस बात का बड़ा उदाहरण है कि कैसे इंडेक्स इन्वेस्टिंग कभी-कभी ऐसे नतीजे देती है जो किसी कंपनी की संभावनाओं को लेकर उसके बुनियादी अनालेसिस से अलग-थलग हों. सैद्धांतिक तौर पर, निवेशकों को कंपनी की इंट्रिंसिक वैल्यू यानी आंतरिक मूल्य और भविष्य की क्षमता के आधार पर स्टॉक ख़रीदने-बेचने चाहिए. हालांकि, इंडेक्स फ़ंड और ETF के ज़रिए पैसिव इन्वेस्टिंग के बढ़ने से एक नया डायनामिक उभर आया है. ये फ़ंड किसी एक स्टॉक के बारे में फ़ैसले नहीं लेते; बल्कि उनका लक्ष्य केवल इंडेक्स के स्वरूप के मुताबिक़ चलना होता है. जब MSCI जैसा इंडेक्स किसी स्टॉक के वेट (weight) में नियमों के आधार पर बदलाव करता है, तो ये ख़रीद या बिक्री का बड़ा दबाव बना सकता है जिसका कंपनी के बुनियादी सिद्धांतों से कोई लेना-देना ही नहीं होता.

ये किसी भी समझदारी भरे निवेश के नज़रिए से उल्टा और तर्कहीन है. ये ऐसा ही है जहां पूंछ (यानी इंडेक्स के नियम) कुत्ते (यानी स्टॉक की क़ीमत) को हिला रही है. इस तरह के मकैनिकल नियम पर आधारित निवेश, बाज़ार को विकृत और यहां तक कि तेज़ उछाल (bubble) पैदा कर देता है. ये कहना, पूरी इंडेक्स इन्वेस्टिंग पर कोई तोहमत नहीं है, लेकिन ये इसके कुछ अनपेक्षित नतीजों और कमज़ोरियों को उठाने की बात ज़रूर है.

जहां तक सामान्य इंडेक्स जैसे सेंसेक्स, निफ़्टी या इनसे जुड़े मिडकैप इंडेक्स की बात है, तो ये इंडेक्स ठीक हैं. मगर, ख़ास तौर पर निवेश पोर्टफ़ोलियो के तौर पर बनाए गए इंडेक्स (जो कि अब चलन हो गया है) का कोई मतलब नहीं है. माइक्रोकैप इंडेक्स जैसे मार्केट के कोने-कतरे को जोड़ कर बनाए गए इंडेक्स असल निवेश पोर्टफ़ोलियो के लिए एक ख़राब मॉडल ही पेश करते हैं.

जो निवेशक पैसिव फ़ंड में निवेश करना चाहते हैं, उन्हें मुख्य इंडेक्स पर ही टिके रहना चाहिए और इन कोने-कतरे वाले इंडेक्स पर ध्यान नहीं देना चाहिए.

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धनक साप्ताहिक

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